ईरान के अस्पतालों पर बरसीं मिसाइलें; WHO ने दुनिया को चेताया
ईरान के अस्पतालों और पाश्चर इंस्टीट्यूट पर हमलों से WHO चिंतित। टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने स्वास्थ्य केंद्रों की सुरक्षा और शांति की अपील की। पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ईरान में स्वास्थ्य केंद्रों पर हो रहे हमलों और पाश्चर इंस्टीट्यूट को हुए नुकसान पर चिंता व्यक्त करते हुए
WHO chief Tedros on Iran health facility attacks : मध्य पूर्व में जारी भीषण सैन्य संघर्ष अब जीवन रक्षक संस्थानों के लिए काल साबित हो रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियानों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए तेहरान के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों और अनुसंधान संस्थानों पर हुए हमलों पर गहरी निराशा व्यक्त की है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर खींचते हुए आगाह किया है कि युद्ध की आग अब उन केंद्रों तक पहुँच गई है जो एक सदी से मानवता की सेवा कर रहे थे।
इस सैन्य टकराव की सबसे दुखद मार ईरान के ऐतिहासिक 'पाश्चर इंस्टीट्यूट' पर पड़ी है। साल 1920 में स्थापित यह संस्थान पिछले 100 वर्षों से अधिक समय से चिकित्सा अनुसंधान और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं का स्तंभ रहा है। ताजा हमलों में इस संस्थान को इतनी गंभीर क्षति पहुँची है कि अब यहाँ स्वास्थ्य सेवाएं देना असंभव हो गया है। महानिदेशक ने स्पष्ट किया कि इस संस्थान के दो विभाग सीधे तौर पर डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर काम करते थे, जिनका ठप होना न केवल ईरान बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए एक बड़ा झटका है।
हमलों का यह सिलसिला केवल अनुसंधान केंद्रों तक सीमित नहीं रहा। 29 मार्च को हुए एक हमले में 'डेलाराम सिना साइकियाट्रिक हॉस्पिटल' को भारी नुकसान पहुँचा, जबकि 31 मार्च को 'टोफिघ दारू फार्मास्युटिकल फैसिलिटी' को निशाना बनाया गया। यह दवा फैक्ट्री कैंसर और मल्टीपल स्केलेरोसिस जैसी जानलेवा बीमारियों की दवाएं बनाने के लिए जानी जाती थी। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 1 मार्च से अब तक ईरान की स्वास्थ्य सुविधाओं पर 20 से अधिक हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता और ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के सदस्य सहित कम से कम नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
युद्ध की यह विभीषिका केवल राजधानी तेहरान तक सीमित नहीं है, बल्कि खुजेस्तान प्रांत के अंदिमेशक में स्थित 'इमाम अली अस्पताल' जैसे दूरदराज के क्षेत्रों में भी धमाके दर्ज किए गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी डब्ल्यूएचओ प्रमुख के इस बयान को साझा करते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन पर चिंता जताई है। वर्तमान स्थिति यह है कि अस्पतालों को खाली कराया जा रहा है और मरीज़ों को बिना इलाज के रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अंततः, डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वास्थ्य कर्मियों और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए, क्योंकि युद्ध के इस दौर में 'शांति' ही सबसे बड़ी औषधि है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
