क्या है 'पर्पल डे' और कैसे हुई थी इसकी शुरुआत ; जानें इस वैश्विक अभियान के पीछे का सच
पर्पल डे 26 मार्च को मनाया जाने वाला वैश्विक अभियान है, जिसका उद्देश्य मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामाजिक कलंक को खत्म करना है। कनाडा की एक बच्ची की पहल से शुरू हुआ यह आंदोलन आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लाखों लोगों को जोड़ चुका है।

पर्पल डे 2026
हर साल 26 मार्च को दुनिया भर में मनाया जाने वाला पर्पल डे केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा वैश्विक जनआंदोलन है जो मिर्गी (एपिलेप्सी) जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उससे जुड़े मिथकों को तोड़ने और सामाजिक कलंक को खत्म करने का प्रयास करता है। यह दिन उन लाखों लोगों के लिए आवाज़ बन चुका है, जो इस बीमारी के साथ जीवन जी रहे हैं और समाज में स्वीकृति की उम्मीद रखते हैं।
इस पहल की शुरुआत एक बेहद प्रेरणादायक कहानी से जुड़ी है। कनाडा की नौ वर्षीय बच्ची कैसिडी मेगन ने, जो स्वयं मिर्गी से जूझ रही थीं, इस विचार को जन्म दिया। उन्होंने महसूस किया कि इस बीमारी को लेकर समाज में भय और गलत धारणाएं गहरी हैं। इन्हें बदलने के लिए उन्होंने 26 मार्च 2008 को पहला पर्पल डे आयोजित किया। इस पहल को एपिलेप्सी एसोसिएशन ऑफ नोवा स्कोटिया का समर्थन मिला, जिसने इसे व्यापक स्तर पर फैलाने में अहम भूमिका निभाई।
इसके बाद 2009 में न्यूयॉर्क स्थित अनिता कॉफमैन फाउंडेशन ने इस अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया। उसी वर्ष पर्पल डे में 100,000 से अधिक छात्र, 95 कार्यस्थल और 116 राजनेता शामिल हुए, जो इस अभियान की बढ़ती ताकत का प्रमाण था। यह दिन धीरे-धीरे स्कूलों, व्यवसायों, सामाजिक संगठनों और सेलिब्रिटीज के सहयोग से एक वैश्विक पहचान बन गया।
साल 2012 में पर्पल डे को कनाडा में आधिकारिक मान्यता मिली, जब इसे रॉयल असेंट के तहत एक कानूनी जागरूकता दिवस घोषित किया गया। यह इस अभियान की ऐतिहासिक उपलब्धि थी, जिसने इसे संस्थागत समर्थन प्रदान किया। पर्पल डे की पहचान का सबसे प्रमुख प्रतीक है बैंगनी रंग। इस दिन लोग बैंगनी कपड़े पहनकर मिर्गी के प्रति समर्थन और जागरूकता का संदेश देते हैं। यह रंग न केवल इस बीमारी का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक है, बल्कि अकेलेपन और संघर्ष को भी दर्शाता है, जो अक्सर इस स्थिति से जूझ रहे लोगों के जीवन का हिस्सा होता है।
इस दिन के प्रमुख उद्देश्य स्पष्ट हैं:
- आम जनता में मिर्गी के प्रति जागरूकता बढ़ाना
- इस बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना
- प्रभावित व्यक्तियों को आत्मविश्वास और सामुदायिक समर्थन प्रदान करना
दुनिया के कई देशों में पर्पल डे के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऑस्ट्रेलिया में यह दिन विभिन्न संगठनों जैसे एपिलेप्सी ऑस्ट्रेलिया, एपिलेप्सी क्वींसलैंड और एपिलेप्सी फाउंडेशन के लिए फंड जुटाने का माध्यम बनता है। वहीं, 2018 में एपिलेप्सी केयर एलायंस ने तकनीकी क्षेत्र से अपील की कि वे मिर्गी के इलाज में नवाचार को आगे बढ़ाएं।
2020 में फ्लोरिडा के वॉल्ट डिज़्नी वर्ल्ड में पर्पल डे का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें करीब 1,000 लोगों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम में जागरूकता सत्र, चिकित्सा विकल्पों पर चर्चा और परिवारों के लिए मार्गदर्शन शामिल था। दिन के अंत में प्रसिद्ध ‘स्पेसशिप अर्थ’ संरचना को बैंगनी रंग में रोशन किया गया, जो इस अभियान के समर्थन का प्रतीक बना। इस आंदोलन ने विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम किया है। 2017 में अनिता कॉफमैन फाउंडेशन ने पर्पल डे के दौरान सबसे बड़े मिर्गी प्रशिक्षण सत्र का आयोजन कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया।
पर्पल डे आज एक ऐसे मंच के रूप में स्थापित हो चुका है, जो न केवल जागरूकता फैलाता है, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में ठोस कदम भी उठाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि जानकारी, सहानुभूति और सामूहिक प्रयास से ही किसी भी बीमारी से जुड़े डर और भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
