वाशिंगटन में भारतीय आम महोत्सव: हजारों लोगों ने चखा देसी स्वाद
अमेरिकी राजधानी के डुपोंट सर्कल में आयोजित 'टेस्ट द ट्रॉपिकल मैजिक' कार्यक्रम में भारतीय आमों और लजीज व्यंजनों का हजारों लोगों ने आनंद लिया।

वाशिंगटन के डुपोंट सर्कल में आयोजित आम महोत्सव के दौरान एक व्यक्ति साक्षात्कार देता हुआ, तस्वीर के ऊपरी कोने में कटे हुए आमों की ट्रे दिख रही है।
वाशिंगटन के डाउनटाउन स्थित डुपोंट सर्कल पर शनिवार को भारतीय आमों और लजीज बिरयानी का स्वाद लेने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित इस 'टेस्ट द ट्रॉपिकल मैजिक' (Taste the Tropical Magic) कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग वर्जीनिया और मैरीलैंड जैसे पड़ोसी इलाकों से अपने बचपन की यादों को ताजा करने और केसर, लंगड़ा, मालदा जैसी बेहतरीन किस्मों का आनंद लेने पहुंचे।
कार्यक्रम में पहुंचीं भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक दिशा ने केसर आम का स्वाद लेते हुए बताया कि उन्हें अपनी दादी द्वारा गर्मियों में आम खिलाने की यादें ताजा हो गईं, जिसके चलते वह यहां आईं। वहीं, फुटबॉल वर्ल्ड कप देखने अमेरिका आए पर्यटक एंड्रयू ने इसे अब तक का सबसे स्वादिष्ट आम बताया। वाशिंगटन के समर कैलेंडर में यह वार्षिक उत्सव पिछले कई वर्षों से लगातार आयोजित हो रहा है और हर साल इसका दायरा बढ़ता जा रहा है।
भारत के अमेरिकी राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कार्यक्रम में कहा कि यहां सिर्फ आम का टुकड़ा नहीं, बल्कि भारत के स्वाद पेश किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष एक छोटे टेस्टिंग बूथ पर मिली भारी सफलता के बाद इस बार इस आयोजन को बड़े स्तर पर विस्तारित किया गया था। डुपोंट सर्कल में पांच टेस्टिंग बूथ लगाए गए थे, जहां आम के अलावा लस्सी, सुक्कुलेंट बिरयानी, मैंगो हलवा और भारतीय चाय-कॉफी का स्वाद भी लोगों को मिला। तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम में 8,000 से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया था और समापन तक भी कतारें कम नहीं हुईं। राजदूत क्वात्रा ने बताया कि मिली अभूतपूर्व प्रतिक्रिया के बाद दूतावास भविष्य में इस तरह के खाद्य संवर्धन कार्यक्रमों के आयोजन को और अधिक बार करने की योजना बना रहा है।
के बी एक्सपोर्ट्स (Kay Bee Exports) के सीईओ कौशल खाकर ने कहा कि आम एक नाजुक फल है और उन्होंने सुपरफास्ट लॉजिस्टिक्स के माध्यम से यह सुनिश्चित किया है कि अमेरिकी प्रवासी भारतीयों को उनका बेहतर मूल्य मिले। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के अध्यक्ष अभिषेक देव ने बताया कि अमेरिका को आमों का निर्यात निरंतर बढ़ रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले साल भारत ने अमेरिका को 2,300 टन आम निर्यात किए थे, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा एक महीने पहले ही पार कर लिया गया है।
भारतीय आमों की अमेरिका में यह कहानी 2006 में शुरू हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने फल को अमेरिकी तटों तक लाने का मार्ग प्रशस्त किया था। यह खबर भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते की घोषणा जितनी ही उत्साहजनक थी। इससे पूर्व अमेरिका ने आम की गुठली में घुन (mango seed weevil) के कारण भारत से आम के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जनवरी 2006 में कृषि विभाग द्वारा विकिरण की कम खुराक से उपचारित उपज के आयात की अनुमति देने के बाद समाधान निकला। तब पहली खेप के रूप में आए भारतीय अल्फोंसो आमों का स्वागत तत्कालीन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि सुसान श्वाब ने अत्यंत उत्साह के साथ किया था।

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