वेनेजुएला में विनाशकारी भूकंप; क्या भारत में अब महंगे होने वाले हैं पेट्रोल-डीजल?
वेनेजुएला में आए 7.5 तीव्रता के महाभूकंप से मची तबाही के बाद भारत की कच्चे तेल की आपूर्ति संकट में. महंगा हो सकता है आयात और बीमा प्रीमियम; निवेश पर भी खतरा.

वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के बाद ला गुआइरा बंदरगाह को आपदा क्षेत्र घोषित किए जाने से समुद्र मार्ग द्वारा भारत आने वाले कच्चे तेल के कार्गो और वैश्विक शिपिंग संचालन पर असर पड़ा है।
Venezuela earthquake impact on India oil import : एक तरफ मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में युद्ध की चिंगारी और दूसरी तरफ लातिन अमेरिकी देश से आई प्रकृति की विनाशकारी मार—भारत की ऊर्जा सुरक्षा इस समय दोतरफा चक्रव्यूह में फंसती नजर आ रही है। वेनेजुएला में आए सदी के सबसे भीषण भूकंप ने न सिर्फ वहां तबाही का मंजर पैदा किया है, बल्कि हजारों मील दूर भारत के नीति-निर्माताओं और तेल रिफाइनरियों की नींद भी उड़ा दी है। विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस प्राकृतिक आपदा के चलते बंदरगाहों को हुए नुकसान, शिपिंग में होने वाली देरी और अचानक बढ़े बीमा प्रीमियम के कारण भारत के लिए कच्चे तेल का आयात न केवल बेहद महंगा हो जाएगा, बल्कि इसकी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) भी बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।
बीते 24 जून को वेनेजुएला की धरती कुछ ही सेकंड के अंतराल पर आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंपों से कांप उठी। इसे पिछले 125 वर्षों का सबसे विनाशकारी भूकंप बताया जा रहा है, जिसने देखते ही देखते हंसते-खेलते शहरों को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया। इस महाविनाश में अब तक सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों गंभीर रूप से घायल हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुख्य झटकों के बाद भी लगातार आ रहे 'आफ्टरशॉक्स' के कारण राहत और बचाव कार्य में भारी बाधा आ रही है, जिससे पूरा प्रशासनिक तंत्र पंगु हो गया है।
भारत के नजरिए से यह आपदा एक ऐसे संवेदनशील समय पर आई है, जब देश ईरान-इजरायल तनाव के कारण तेल आपूर्ति में लगे झटकों से उबरने की कोशिश कर रहा था। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक शांति समझौते ने वैश्विक बाजार को यह उम्मीद दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाला तेल व्यापार अब सामान्य हो जाएगा। लेकिन भारतीय रिफाइनरियों ने राहत की सांस ली ही थी कि वेनेजुएला के इस संकट ने भारत के सामने एक नया और अप्रत्याशित आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
ईडीएमई इंश्योरेंस ब्रोकर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्लोबल हेड ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज, कुणाल खन्ना के अनुसार, हाल के महीनों में वेनेजुएला भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक स्रोत के रूप में उभरा था। मध्य पूर्व में जारी अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए भारतीय तेल कंपनियों ने जोखिम को कम करने के लिए वेनेजुएला का रुख किया था। यही कारण था कि अप्रैल और मई के महीनों में भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी की, जिससे वेनेजुएला बेहद कम समय में भारत के शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ताओं की सूची में शामिल हो गया। यदि वहां का निर्यात ढांचा लंबे समय तक ठप रहता है, तो इसका सीधा असर भारत के घरेलू बाजार पर पड़ेगा।
ऊर्जा मामलों के जानकारों का कहना है कि यह जोखिम केवल तेल संयंत्रों या रिफाइनरियों को पहुंचे सीधे नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा पूरी सप्लाई चेन को अपनी चपेट में ले चुका है। यदि वेनेजुएला के तेल निर्यात टर्मिनल सुरक्षित भी बच जाते हैं, तब भी देश में बड़े पैमाने पर बिजली गुल होने, मुख्य सड़कों और परिवहन नेटवर्क के टूटने तथा बंदरगाहों पर आपातकालीन प्रतिबंध लागू होने के कारण कच्चे तेल से लदे जहाजों (कार्गो) की आवाजाही हफ्तों के लिए ठप हो सकती है। वेनेजुएला सरकार द्वारा वहां के प्रमुख कार्गो बंदरगाह 'ला गुआइरा' को आपदा क्षेत्र घोषित किए जाने के बाद से वैश्विक शिपिंग संचालन पूरी तरह चरमरा गया है।
इस लॉजिस्टिक व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों पर वित्तीय बोझ भारी मात्रा में बढ़ने वाला है। जहाजों को माल लोड करने के लिए बंदरगाहों पर लंबा इंतजार करना होगा, जिससे रूट बदलने की नौबत आएगी और डेमरेज शुल्क (विलंब शुल्क) में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी। इन अतिरिक्त खर्चों का सीधा वित्तीय बोझ अंततः तेल कारोबारियों, भारतीय रिफाइनरियों और बीमा कंपनियों पर ही पड़ेगा, जो अंततः उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकता है।
इस आपदा ने समुद्री बीमा क्षेत्र के सामने भी एक नया कानूनी और परिचालन संबंधी संकट खड़ा कर दिया है। कुणाल खन्ना ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि वेनेजुएला से आने वाले जहाजों के लिए बीमा पॉलिसियां अब तक मुख्य रूप से भू-राजनीतिक जोखिमों और अमेरिकी प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर तैयार की जाती थीं। लेकिन अब इस भीषण भूकंप ने साबित कर दिया है कि इस समुद्री मार्ग का आकलन करते समय प्राकृतिक आपदाओं को भी एक बड़े 'जोखिम कारक' के रूप में शामिल करना होगा, जिससे आने वाले समय में शिपिंग बीमा प्रीमियम का महंगा होना तय है।
इस संकट के बीच भारत का बड़ा रणनीतिक और आर्थिक निवेश भी दांव पर लग गया है। भारत की सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) ने वेनेजुएला की प्रमुख तेल परियोजनाओं में भारी-भरकम निवेश किया हुआ है। यदि वहां उत्पादन या निर्यात लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत के आर्थिक और परिचालन हितों को गहरी चोट पहुंचेगी। दिलचस्प बात यह है कि इसी महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज से टेलीफोन पर वार्ता की थी, जिसमें खनन, महत्वपूर्ण खनिज, दवा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में भारतीय निवेश को बढ़ाने पर सहमति बनी थी। परंतु इस विनाशकारी भूकंप के बाद इन महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय योजनाओं में भारी देरी या बड़े बदलावों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस पूरी घटनाक्रम ने वैश्विक व्यापार के एक कड़वे सच को उजागर किया है कि किसी नए देश से व्यापारिक संबंध शुरू करने से जोखिम खत्म नहीं होता, बल्कि सिर्फ उसका स्वरूप बदल जाता है। भारत ने मध्य पूर्व पर अपनी अत्यधिक निर्भरता को कम करने और अपनी ऊर्जा टोकरी में विविधता लाने के लिए वेनेजुएला का हाथ थामा था, लेकिन प्रकृति के इस एक झटके ने रणनीतिक रास्तों में छिपी नई चुनौतियों से रूबरू करा दिया है। फिलहाल, नुकसान के सटीक आंकड़ों और तेल बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने में कुछ समय लगेगा, जिस पर दुनिया भर की शिपिंग कंपनियां, ऊर्जा कारोबारी और भारत सरकार की पैनी नजर बनी हुई है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
