होर्मुज जलडमरूमध्य पर मंडराया खतरा; रुबियो ने कूटनीतिक घेराबंदी के साथ बुलाई आपात बैठक
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और ईरान की चुनौतियों पर ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के साथ रणनीति साझा की। समुद्री स्थिरता पर बड़ा दांव।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो
Hormuz Strait oil trade security US : वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की धमनियों के रूप में पहचाने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट पर मंडराते खतरों के बीच अमेरिका ने एक बार फिर कूटनीतिक मोर्चे पर आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के शीर्ष नेतृत्व के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवाद किया, जिसका उद्देश्य ईरान की चुनौतियों से निपटना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को सुरक्षित बनाए रखना है। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, रुबियो ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और ब्रिटेन की विदेश सचिव यवेट कूपर के साथ अलग-अलग उच्च-स्तरीय चर्चा की। इन चर्चाओं का केंद्र बिंदु फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला वह संकरा समुद्री मार्ग रहा, जहाँ से दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि रुबियो और पेनी वोंग के बीच हुई मंत्रणा में 'स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र' की प्रतिबद्धता को नए सिरे से दोहराया गया है। इस संवाद के दौरान अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया गठबंधन को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अनिवार्य स्तंभ बताया गया। इसी कड़ी में ब्रिटिश विदेश सचिव इवेट कूपर के साथ हुई बातचीत में भी समुद्री मार्गों को निर्बाध रखने और ईरान के प्रभाव को नियंत्रित करने पर गंभीर मंथन हुआ। यद्यपि अमेरिकी प्रशासन ने इन बैठकों में तय किए गए सैन्य या कूटनीतिक कदमों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन इन वार्ताओं के समय और स्वरूप ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
होर्मुज स्ट्रेट की भू-राजनीतिक प्रासंगिकता को नजरअंदाज करना नामुमकिन है, क्योंकि यहाँ किसी भी प्रकार की रुकावट वैश्विक अर्थव्यवस्था में भूचाल ला सकती है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह घटनाक्रम चिंता का विषय है, क्योंकि भारतीय ऊर्जा जरूरतों का एक विशाल हिस्सा इन्हीं खाड़ी देशों से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर है। इस कूटनीतिक सक्रियता के बीच रुबियो ने इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन तिमोथियोस से भी द्विपक्षीय वार्ता की, जहाँ पूर्वी अफ्रीका में संघर्ष कम करने और सुरक्षा साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी। अंततः, वाशिंगटन की यह सक्रियता यह स्पष्ट करती है कि अमेरिका अब अपने सहयोगियों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए किसी भी बड़े हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा, जो भविष्य में ईरान के लिए कड़े संदेश के रूप में देखा जा सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
