क्या अमेरिका ने भारत को फिर बनाया निशाना? जानिए US के नए 12.5% टैरिफ प्लान में कोन से देश हैं शामिल
भारत समेत 60 देशों पर अमेरिका ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को लेकर 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। UTSR की जांच में भारत को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। प्रस्ताव फिलहाल समीक्षा चरण में है, लेकिन लागू होने पर भारतीय निर्यात और भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर बड़ा असर पड़ सकता है।

भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प
वैश्विक व्यापार जगत में एक बड़े घटनाक्रम के तहत अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों ने जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से तैयार किए गए सामानों के आयात और व्यापार को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक समुदाय के साथ-साथ भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (UTSR) ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत की गई जांच के बाद यह प्रस्ताव सामने रखा है। UTSR ने 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की समीक्षा करते हुए निष्कर्ष निकाला कि कई देशों की व्यवस्थाएं जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों को प्रभावी रूप से रोकने में विफल रही हैं, जिससे अमेरिकी कंपनियों और श्रमिकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रस्ताव के अनुसार भारत समेत 54 देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। वहीं कुछ अन्य देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का सुझाव दिया गया है, जिन्होंने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर आंशिक प्रतिबंध या प्रतिबद्धताएं तो दिखाई हैं, लेकिन अमेरिका के अनुसार वे पर्याप्त नहीं हैं।
जिन देशों को 12.5 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में रखा गया है उनमें भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड किंगडम, वियतनाम और तुर्किये समेत कई अन्य देश शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि इन देशों की नीतियां और उनका प्रवर्तन तंत्र वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन श्रम से बने उत्पादों के प्रवेश को प्रभावी ढंग से नहीं रोक पा रहा है।
भारत को विशेष रूप से निशाने पर लिए जाने के पीछे UTSR ने दावा किया है कि देश में जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें लागू कराने की व्यवस्था पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं है। 92 पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय ने कहा कि भारत "जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी रूप से लागू करने में विफल रहा है।" रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऐसे उत्पाद कई बार मध्यवर्ती देशों के माध्यम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में प्रवेश कर जाते हैं, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। अमेरिका ने भारत को कुछ कपास आधारित आपूर्ति श्रृंखलाओं में संभावित मध्यस्थ देश के रूप में भी चिन्हित किया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने इस संबंध में कहा कि अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक स्तर पर असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है और घरेलू उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
हालांकि अमेरिका की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय अभी अंतिम नहीं है। प्रस्ताव फिलहाल सार्वजनिक परामर्श प्रक्रिया के चरण में है। इच्छुक पक्ष 6 जुलाई 2026 तक अपनी टिप्पणियां और सुझाव प्रस्तुत कर सकेंगे, जबकि 7 जुलाई 2026 को इस विषय पर सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्राप्त प्रतिक्रियाओं और उद्योग जगत की राय के आधार पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो इसका असर भारत के कई निर्यात-आधारित क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विशेष रूप से वस्त्र और परिधान उद्योग, कपास से जुड़े उत्पाद, विनिर्माण क्षेत्र, उपभोक्ता वस्तुएं तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भर उद्योग प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि अमेरिका ने संकेत दिया है कि कुछ महत्वपूर्ण श्रेणियों को प्रस्तावित शुल्क से छूट दी जा सकती है। इनमें ऊर्जा उत्पाद, रेयर अर्थ खनिज, दवाइयां, कुछ कृषि उत्पाद, चुनिंदा औद्योगिक वस्तुएं तथा कॉफी, बीफ, फल और मेवों जैसी खाद्य सामग्री शामिल हैं।
इस बीच भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अमेरिकी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और प्रस्तावित कदम अभी अंतिम नहीं है। मंत्रालय का कहना है कि सार्वजनिक राय और हितधारकों के सुझावों पर विचार करने के बाद ही अमेरिका कोई अंतिम निर्णय लेगा। माना जा रहा है कि भारत इन आरोपों को चुनौती देगा और जारी व्यापार वार्ताओं के माध्यम से समाधान निकालने की कोशिश करेगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ केवल व्यापारिक उपाय नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच चल रही व्यापक आर्थिक और रणनीतिक चर्चाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं। यदि अमेरिका इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देता है तो यह हाल के वर्षों की सबसे बड़ी श्रम-आधारित व्यापारिक कार्रवाइयों में से एक होगी, जिसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर दूरगामी रूप से देखा जा सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
