मिडिल ईस्ट में युद्धविराम खत्म होने से पहले ट्रंप ने ईरान को दी तबाही की चेतावनी। जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद रवाना। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Middle East conflict : दुनिया के सबसे अशांत क्षेत्र मिडिल ईस्ट में शांति की डोर एक बार फिर टूटने की कगार पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो सप्ताह का युद्धविराम मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को समाप्त होने जा रहा है। इस नाजुक घड़ी में पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अगले 48 घंटों में युद्ध और शांति के बीच का फैसला होने वाला है। खबर है कि शांति मिशन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर एक उच्चस्तरीय डेलिगेशन के साथ दोबारा पाकिस्तान पहुंच रहे हैं, ताकि ईरान के साथ दूसरे दौर की निर्णायक बातचीत की जा सके।

इस कूटनीतिक हलचल के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बार डेलिगेशन का हिस्सा नहीं होंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं व्हाइट हाउस से न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में इस मिशन की पुष्टि की है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि शांति वार्ता के लिए स्टीव विटकॉफ सोमवार रात को ही इस्लामाबाद के लिए उड़ान भर रहे हैं। वहीं, जेरेड कुशनर मंगलवार को होने वाली वार्ता के मुख्य दौर में शामिल होंगे। अमेरिकी मीडिया और सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि जेडी वेंस की अनुपस्थिति और कुशनर की एंट्री ट्रंप प्रशासन की उस सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जहां व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों को युद्ध की आग बुझाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

हालाँकि, इस शांति मिशन के पीछे ट्रंप की जो भाषा है, वह बेहद सख्त और डराने वाली है। फॉक्स न्यूज को दिए एक विस्फोटक साक्षात्कार में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को सीधी और अंतिम चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान में वर्तमान में 'उदारवादियों' और 'पागलों' के बीच एक वैचारिक युद्ध चल रहा है, जिसका नतीजा पूरी दुनिया भुगत सकती है। उन्होंने बेहद कड़े शब्दों में कहा कि यदि ईरान उस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करता है जिसे अमेरिका ने तैयार किया है, तो परिणाम विनाशकारी होंगे। ट्रंप ने खुले तौर पर धमकी देते हुए कहा कि समझौता न होने की सूरत में वे ईरान के सभी प्रमुख पुलों और पावर प्लांट्स को जमींदोज कर देंगे, जिससे पूरा देश तबाही के मुहाने पर खड़ा हो जाएगा।

यह घटनाक्रम न केवल मिडिल ईस्ट के भविष्य को तय करेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि क्या परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों के बीच पाकिस्तान की जमीन पर हो रही यह बातचीत किसी नए वैश्विक संकट को टाल पाएगी। 21 अप्रैल की समयसीमा जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों और कूटनीतिक हलकों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। अगर इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता विफल रहती है, तो मंगलवार की रात के बाद मिडिल ईस्ट में एक ऐसा भीषण सैन्य संघर्ष छिड़ सकता है, जिसकी चपेट में पूरी दुनिया आ सकती है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर की यह 'सीक्रेट मिशन' कूटनीति सफल होती है या ट्रंप की चेतावनी के अनुरूप ईरान तबाही की राह पर आगे बढ़ जाता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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