US Navy attack on Iranian tanker Hasna : खाड़ी क्षेत्र के अशांत पानी में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है, जहाँ कूटनीतिक वार्ताओं की आहट के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक सनसनीखेज खुलासे में बताया कि ओमान की खाड़ी में ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे एक ईरानी झंडे वाले तेल टैंकर 'हस्ना' को अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने निशाना बनाकर समुद्र के बीच ही निष्क्रिय कर दिया। बुधवार सुबह हुई यह कार्रवाई उस समय की गई जब दोनों देशों के बीच युद्ध विराम की शर्तों पर पर्दे के पीछे बातचीत चलने की खबरें आ रही थीं। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वाशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत की मेज पर होने के बावजूद अपनी सैन्य नाकाबंदी को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं है।

घटना के विवरण के अनुसार, टैंकर 'हस्ना' बिना माल के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से ईरानी पोर्ट की ओर जा रहा था। अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' (CVN 72) से उड़ान भरने वाले एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू विमानों ने पहले जहाज को रुकने की चेतावनी दी। जब टैंकर के चालक दल ने इन चेतावनियों को अनसुना कर दिया, तो अमेरिकी पायलटों ने 20 एमएम कैनन गन से सटीक गोलाबारी करते हुए टैंकर के रडार सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया। सेंट्रल कमांड ने स्पष्ट किया कि रडार के बिना जहाज अपनी दिशा और नेविगेशन क्षमता खो चुका है और अब वह ईरानी तट तक पहुंचने की स्थिति में नहीं है।

इस सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रूथ सोशल' पर अपनी आक्रामक रणनीति को और स्पष्ट किया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके आदेश पर पेंटागन ने होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों को निकालने का मिशन रोक दिया है, लेकिन ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण सैन्य नाकाबंदी पहले से कहीं अधिक प्रभावी ढंग से लागू रहेगी। राष्ट्रपति ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि संघर्ष के दौरान ईरान का सैन्य ढांचा लगभग ध्वस्त हो चुका है। उनके अनुसार, ईरान की 159 जहाजों वाली नौसेना और वायु सेना के बेड़े को अमेरिकी प्रहारों ने 'टुकड़े-टुकड़े' कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के रडार, मिसाइल भंडार और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम अब अस्तित्वहीन हो चुके हैं।

दूसरी ओर, तेहरान में माहौल तनावपूर्ण और उत्तेजक बना हुआ है। अमेरिकी हमलों और धमकियों के बावजूद, बुधवार रात हजारों ईरानी लोग तेहरान की सड़कों पर उतर आए और देश के नेतृत्व के समर्थन में विशाल रैलियां निकालीं। 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारों और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीरों के साथ प्रदर्शनकारी अपनी सैन्य शक्ति पर भरोसा जता रहे हैं। इस जन आक्रोश और अमेरिकी सैन्य दबाव के बीच, सीएनएन की रिपोर्ट बताती है कि दोनों देश एक 'मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट' के करीब हैं, जो इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त कर सकता है। यह सैन्य कार्रवाई और इसके साथ चलती कूटनीतिक रस्साकशी इस बात का प्रमाण है कि खाड़ी क्षेत्र का भविष्य अब अगले 24 घंटों के जवाब और ट्रंप की अगली संभावित बमबारी की धमकी के बीच झूल रहा है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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