US-China relations : चीन के दावे पर ताइपे का पलटवार; ट्रंप–जिनपिंग मीटिंग में बढ़ा तनाव
US-China relations : अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग की बातचीत में ताइवान का मुद्दा गरमाया। जिनपिंग ने ताइवान की “चीन में वापसी” का दावा किया, जबकि ताइवान के पीएम चू जंग ताई ने इसे खारिज किया। जापान के साथ ट्रंप की रणनीति और चीन के दबाव ने पूर्वी एशिया में तनाव बढ़ा दिया।

US-China relations
US-China relations : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सोमवार को हुई लंबी फोन बातचीत में ताइवान का मुद्दा एक बार फिर उभरा। जिनपिंग ने बातचीत में ताइवान की “चीन में वापसी” को बीजिंग की स्पष्ट नीति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का हिस्सा बताया। उनके इस बयान के सामने आने के बाद ताइवान के प्रधानमंत्री चू जंग ताई ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया और देश की स्वतंत्रता पर जोर दिया।
चीन के आधिकारिक बयान के अनुसार जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि ताइवान का “चीन में वापस आना” अंतरराष्ट्रीय क्रम का अनिवार्य हिस्सा है और बीजिंग इसे लेकर स्पष्ट रुख रखता है। उन्होंने कहा कि यह नीति न केवल चीन की घरेलू प्राथमिकताओं का हिस्सा है बल्कि पोस्ट-वार अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के अनुरूप भी है।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ताइवान के प्रधानमंत्री चू जंग ताई ने स्पष्ट किया कि 23 मिलियन ताइवानी नागरिकों के लिए किसी “वापसी” का विकल्प ही अस्वीकार्य है। उन्होंने संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा कि ताइवान एक स्वतंत्र देश है और किसी बाहरी दावे के अधीन नहीं होगा।
इसी दौरान मंगलवार को जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच भी लंबी बातचीत हुई। ताकाइची ने बताया कि ट्रंप ने अनुरोध पर कॉल किया और कहा कि वे मेरी “अच्छी दोस्त” हैं। इस कॉल में जापान और अमेरिका के संबंधों के साथ क्षेत्रीय रणनीति पर चर्चा हुई। अमेरिकी अधिकारियों ने इस मामले में सतर्कता बरती, क्योंकि ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में चीन के साथ “मजबूत संबंधों” का जिक्र किया, लेकिन ताइवान का नाम नहीं लिया।
जापानी मीडिया और विशेषज्ञों का अनुमान है कि ट्रंप ताइवान पर खुलकर कुछ इसलिए नहीं कह रहे क्योंकि चीन के साथ व्यापार समझौते पर असर पड़ने का डर है। यह मौन कदम बीजिंग को मजबूती देने और पूर्वी एशिया में रणनीतिक दबाव बनाए रखने का संकेत माना जा रहा है।
इस घटनाक्रम से साफ होता है कि चीन ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका जापान के साथ गठबंधन और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखते हुए चीन के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंध भी साधने की कोशिश कर रहा है। ताइवान, जापान और अमेरिका के बीच यह जटिल त्रिकोणीय स्थिति पूर्वी एशिया में नई राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौतियों को जन्म दे सकती है।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
