इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान की सीधी वार्ता; हॉर्मुज और लेबनान पर पेंच फंसा
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की सीधी बातचीत बेनतीजा रही। हॉर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान सीजफायर पर दोनों देशों के बीच तनाव बरकरार है।

US Iran Peace Talks Islamabad : वैश्विक कूटनीति के इतिहास में शनिवार, 11 अप्रैल को एक नया और अप्रत्याशित अध्याय जुड़ा जब दशकों के कटु संबंधों के बाद अमेरिका और ईरान के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने ईरानी अधिकारियों के साथ सीधे संवाद की शुरुआत की, जिसे दुनिया भर के कूटनीतिज्ञ एक बड़े मोड़ के रूप में देख रहे हैं। आमतौर पर मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान करने वाले इन दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह मुलाकात उस समय हो रही है जब पश्चिम एशिया युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। हालांकि, पहले दौर की घंटों चली चर्चा के बावजूद किसी भी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी है और दोनों पक्षों ने अपने कड़े रुख बरकरार रखे हैं।
ईरानी मीडिया के अनुसार, वार्ता की मेज पर बैठते ही तेहरान ने अमेरिका के समक्ष चार कड़ी शर्तें रखीं, जिसने बातचीत के शुरुआती माहौल में ही तनाव पैदा कर दिया। मुख्य चर्चा का केंद्र 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' बना रहा, जहाँ तेल की वैश्विक आपूर्ति और नौवहन सुरक्षा को लेकर दोनों देश अपनी-अपनी स्थिति पर अड़े हुए हैं। पहले दौर की समाप्ति पर दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्य विवादित मुद्दों की एक लिखित रूपरेखा तैयार कर एक-दूसरे को सौंपी है। रविवार को दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित है, जिसमें इन लिखित प्रस्तावों पर गहन मंथन होने की उम्मीद है। इस ऐतिहासिक संवाद का उद्देश्य न केवल द्विपक्षीय तनाव कम करना है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाले समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाना भी है।
इस रणनीतिक संवाद में लेबनान का मुद्दा भी प्रमुखता से छाया रहा। ईरान ने अमेरिका से स्पष्ट रूप से मांग की है कि वह इजरायल पर दबाव बनाकर लेबनान में तत्काल युद्धविराम (सीजफायर) लागू कराए। ईरान की चिंता का मुख्य कारण हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का जारी सैन्य अभियान है, जिसे तेहरान शांति की कोशिशों में सबसे बड़ा रोड़ा मान रहा है। हालांकि, अमेरिका ने इस पर कोई ठोस प्रतिबद्धता नहीं जताई है, जिससे यह मसला अभी भी अधर में लटका हुआ है। इस बीच, लेबनान के प्रधानमंत्री ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा टाल दिया है और अगले सप्ताह इजरायल व लेबनान के राजनयिकों की संभावित मुलाकात पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
कूटनीतिक वार्ता के समांतर, जमीनी स्तर पर भी सैन्य हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां अधिकारी मेज पर सुलह की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना के जहाजों ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' से बारूदी सुरंगें हटाने का बड़ा ऑपरेशन शुरू कर दिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े निर्देश के बाद उठाया गया है जिसमें उन्होंने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में तेल आपूर्ति बाधित करने वाली ताकतों की आलोचना की थी। हॉर्मुज से बारूदी सुरंगों का हटाया जाना वैश्विक शिपिंग के लिए राहत की खबर तो है, लेकिन ईरान के साथ जारी गतिरोध के बीच यह सैन्य सक्रियता किसी भी समय स्थिति को विस्फोटक बना सकती है। अब रविवार की वार्ता यह तय करेगी कि क्या इस्लामाबाद शांति का दूत बनेगा या यह कोशिश भी विफल कूटनीति का हिस्सा बनकर रह जाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
