भारत और अमेरिका के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सलाहकार और व्यापार मामलों के विशेषज्ञ पीटर नवारो ने एक बार फिर से भारत को कठघरे में खड़ा किया है। मंगलवार से नई दिल्ली में शुरू होने वाली भारत अमेरिका व्यापार वार्ता से पहले नवारो ने दावा किया कि “भारत आखिरकार बातचीत की टेबल पर आ रहा है।” उनका यह बयान दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और वार्ता की अहमियत को और ज्यादा बढ़ा देता है।


नवारो का कड़ा बयान :


नवारो ने कहा कि अगर भारत अमेरिका के साथ व्यापारिक मुद्दों को हल नहीं करता तो हालात उसके लिए मुश्किल हो सकते हैं। इससे पहले भी उन्होंने भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि भारत रूस से तेल खरीदकर युद्ध को बढ़ावा दे रहा है और अमेरिकी बाजार में प्रवेश के लिए अनुचित टैरिफ लगा रहा है। इतना ही नहीं, नवारो ने भारत को "टैरिफ का महाराजा" करार देते हुए रूस-यूक्रेन युद्ध को "मोदी का युद्ध" तक बता दिया था।


वार्ता से पहले अमेरिकी दबाव :


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इस बार की भारत अमेरिका व्यापार वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब दोनों देशों के रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो चुके हैं। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान किया था, जबकि कुछ सामानों पर यह दर 50 प्रतिशत तक कर दी गई। इसका असर भारत के निर्यात पर साफ दिखाई दिया और अगस्त में भारत का निर्यात पिछले नौ महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया।



सोमवार को वरिष्ठ अमेरिकी वार्ताकार ब्रेंडन लिंच नई दिल्ली पहुंचे और मंगलवार से होने वाली बातचीत में हिस्सा लेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में कृषि, ऊर्जा और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दों पर जोरदार चर्चा होगी।


रिश्तों में तल्खी और नरमी के संकेत :


ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ बढ़ाने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास आई है। लेकिन इसी बीच ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें "महान प्रधानमंत्री" बताया और दोस्ती का भरोसा जताया। मोदी ने भी जवाब में कहा कि भारत अमेरिका के साथ दोस्ताना रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहता है। इस वजह से विशेषज्ञों को उम्मीद है कि वार्ता के दौरान किसी नतीजे पर पहुंचने की संभावना बन सकती है।



भारत के लिए बड़ी चुनौती :


विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारत अमेरिका व्यापार वार्ता में भारत को अपनी रणनीति बेहद सावधानी से बनानी होगी। एक तरफ अमेरिका दबाव की राजनीति कर रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत को अपने आर्थिक हित भी बचाने हैं। अगर इस बार कोई ठोस समझौता नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में भारत के निर्यात पर और बड़ा असर पड़ सकता है। स्पष्ट है कि पीटर नवारो का बयान सिर्फ बयानबाजी नहीं बल्कि एक तरह से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश है। आने वाले दिनों में होने वाली भारत अमेरिका व्यापार वार्ता यह तय करेगी कि दोनों देशों के रिश्ते सहयोग की दिशा में बढ़ते हैं या तनाव और गहराता है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story