पिछले कुछ दिनों से अंतरराष्ट्रीय स्तरों पर अनेको घटनाये घट रही है। कही जगहों पर युद्ध का माहौल छाया है तो कही जगहों पर इस युद्ध को रोकने हेतु नियमावली या योजनाए बनायीं जा रही है। इसी दौरान इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize ) कौन लेगा इसकी भी चर्चा कुछ समय से चालू थी। इस बिच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार की स्पर्धा में आगे आने की बहुत कोशिश की। हर देश में जाकर खुद से ही उन्होंने शांति प्रस्तापित करने के लिए क्या क्या किया इसके बारे खुद की ही स्तुती करते हुए नजर ए थे, लेकिन उनके इसी सपने की धज्जिया उड़ते हुए नजर आई। इस साल याने की 2025 के Nobel Peace Prize का एलान हो चूका है। इस पुरस्कार की विजेता वेनेजुएला की मारिया कोरीना माचाडो (María Corina Machado) बनी है। तो आइए जानते है इस विषय को अधिक विस्तार से।


Nobel Peace Prize 2025 की विजेता मारिया कोरीना माचाडो (María Corina Machado) यह वेनेज़ुएला में स्थित है। इन्हे वैश्विक स्तर पर शांति स्थापन करने और वैश्विक संघर्षों को कम करने में बड़े योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया गया है। ट्रंप यह पुरस्कार पाना चाहते थे। लेकिन उनका यह सपना अधूरा का अधुराही रह गया है। यह पुरस्कार हर साल ऐसे व्यक्तियों और संसंथाओं को दिया जाता है जिन्होंने वैश्विक शांति, मानवाधिकार और संघर्ष समाधान में आपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। माचाडो ने वर्षों तक सत्तावादी राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के शासन के खिलाफ लोकतांत्रिक आंदोलन का नेतृत्व किया और हिंसा या सशस्त्र विरोध के बजाय शांतिपूर्ण जन-आंदोलन और राजनीतिक संवाद के माध्यम से बदलाव की दिशा चुनी।

नोबेल कमिटी ने माचाडो के प्रयास को “लोकतांत्रिक मूल्यों की वैश्विक रक्षा का प्रतीक” बताया। वेनेज़ुएला में लोकतंत्र को लेकर चिंता बढ़ रही है। इसे कम करनेका उपाय मचोड़ के पास है। माचाडो की यही मुहिम वहां के नागरिक समाज को नई उम्मीद और ऊर्जा दे रही है।

इस ऐलान के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार जीतने का सपना टूट गया। ट्रंप लंबे समय से दावा कर रहे थे कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में मध्यस्थता और युद्धविराम में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विशेषकर इजरायल-हमास संघर्ष और अन्य वैश्विक विवादों में शांति स्थापित करने का श्रेय अपने नाम किया था। हालांकि, नॉर्वेजियन नोबेल कमिटी ने इस बार उनके प्रयासों की बजाय माचाडो के लोकतांत्रिक संघर्ष को प्राथमिकता दी। इस बार का यह पुरस्कार ये संदेश देता है कि असली शांति केवल कूटनीति या युद्धविराम से नहीं बल्कि लोकतंत्र और मानवाधिकार के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष से भी संभव हो सकती है।

Updated On
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story