सीजफायर ठुकराते ही भड़के डोनाल्ड ट्रंप; होर्मुज की घेराबंदी और 'दुष्ट' ईरान के खिलाफ अमेरिका का 'प्लान-विनाश' तैयार!
ट्रंप ने ईरान को 'दुष्ट' राष्ट्र बताते हुए मंगलवार रात तक होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का दिया अल्टीमेटम।

वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक युद्ध के काले बादल और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे खूनी संघर्ष के बीच एक ऐसी चेतावनी जारी की है, जिसने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरान जैसे "दुष्ट" राष्ट्र को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका को महज एक रात की जरूरत है। यह कड़ा बयान उस समय आया है जब ईरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 45 दिनों के अस्थायी युद्धविराम (सीजफायर) को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के इस फैसले ने कूटनीति के सभी दरवाजों को लगभग बंद कर दिया है और अब सैन्य विकल्प ही सबसे ऊपर नजर आ रहे हैं।
सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोनाल्ड ट्रंप का तेवर बेहद आक्रामक दिखा। उन्होंने ईरान के नागरिक और सैन्य बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को निशाना बनाने की अपनी धमकी को दोहराते हुए कहा कि वह रात शायद मंगलवार की ही शाम हो सकती है। ट्रंप की इस समयसीमा का सीधा संबंध होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से है। अमेरिका ने तेहरान को इस बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक तेल मार्ग को फिर से खोलने के लिए मंगलवार रात 8 बजे (पूर्वी समय) तक की मोहलत दी है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि इस समयसीमा के भीतर समझौता नहीं हुआ या जलमार्ग नहीं खुला, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को मलबे के ढेर में बदल देगी।
इस संघर्ष की जड़ें 28 फरवरी को हुए उस भीषण हमले में छिपी हैं, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर धावा बोला था। उस हमले ने ईरान की सत्ता संरचना को हिलाकर रख दिया था। खबरों के मुताबिक, उस शुरुआती सैन्य कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, उनकी पत्नी और कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए थे। तब से यह तनाव एक पूर्ण विकसित युद्ध में तब्दील हो चुका है। हालिया घटनाक्रम में, पाकिस्तान के माध्यम से मध्यस्थता की कोशिशें भी विफल रहीं, क्योंकि ईरान ने अस्थायी शांति के बजाय स्थायी युद्ध समाप्ति की मांग रखी है।
ट्रंप ने ईरान की वर्तमान सैन्य क्षमता पर तंज कसते हुए कहा कि अब उनके पास वापस लड़ने की कोई ताकत नहीं बची है। उन्होंने दावा किया कि तेहरान के पास अब केवल कुछ गिने-चुने मिसाइल और ड्रोन शेष हैं, जो किसी भी बड़े अमेरिकी हमले को झेलने में सक्षम नहीं हैं। राष्ट्रपति ने यह भी विश्वास दिलाया कि अमेरिका के पास युद्ध को निर्णायक मोड़ पर ले जाने के लिए कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने दो अमेरिकी पायलटों को बचाने के सफल मिशन का उदाहरण देते हुए अमेरिकी सैन्य श्रेष्ठता का लोहा मनवाया। ट्रंप ने साफ किया कि उनका अंतिम उद्देश्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है, भले ही इसके लिए उसे पूरी तरह तबाह क्यों न करना पड़े।
अब सबकी नजरें मंगलवार रात की उस समयसीमा पर टिकी हैं, जो ईरान के भविष्य का फैसला कर सकती है। यदि कूटनीतिक स्तर पर अंतिम क्षणों में कोई चमत्कार नहीं हुआ, तो होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद एक बड़े क्षेत्रीय और शायद वैश्विक संकट का कारण बन सकता है। ट्रंप की "एक रात" वाली धमकी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि व्हाइट हाउस अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। दुनिया सांसें थामकर देख रही है कि क्या कल की सुबह ईरान के लिए एक नई तबाही की इबारत लिखेगी या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
