Donald Trump ground operation plan against Iran 2026 : अमेरिका और ईरान के बीच सुलगती जंग अब उस निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है, जहां से वापसी का हर रास्ता बारूद के ढेर से होकर गुजरता है। युद्ध के 35वें दिन भी शांति की कोई किरण नजर नहीं आ रही है, बल्कि तनाव के बादल और गहरे हो गए हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ के एक सनसनीखेज बयान ने खलबली मचा दी है। ज़रीफ़ ने तेहरान को सलाह दी है कि वह अपनी जीत की घोषणा कर इस रक्तपात को तुरंत विराम दे दे। यह मशविरा ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ एक बड़े 'ग्राउंड ऑपरेशन' की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं, जो इस क्षेत्रीय संघर्ष को विश्व युद्ध की दहलीज तक ले जा सकता है।

जवाद ज़रीफ़ ने ट्रंप की कार्यशैली और युद्ध की विभीषिका को भांपते हुए तेहरान को 'ट्रंप की भाषा' में ही जवाब देने का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि यदि ट्रंप युद्ध रोकने में अक्षम साबित हो रहे हैं, तो ईरान को स्वयं पहल करनी चाहिए। ज़रीफ़ के अनुसार, ईरान को अपनी सैन्य शक्ति का लोहा मनवाते हुए खुद को विजेता घोषित करना चाहिए और फिर एक ऐसी कूटनीतिक डील की ओर बढ़ना चाहिए जो न केवल युद्ध को रोके, बल्कि भविष्य के संकटों को भी हमेशा के लिए समाप्त कर दे। उन्होंने विशेष रूप से 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' का कार्ड खेलने की सलाह दी है। ज़रीफ़ का मानना है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का प्रस्ताव देकर ईरान, अमेरिका से अपने ऊपर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की शर्त मनवा सकता है।

दूसरी ओर, वॉशिंगटन से आ रही खबरें मानवता के लिए डराने वाली हैं। 'वॉशिंगटन पोस्ट' की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान की धरती पर उतरने यानी 'ग्राउंड ऑपरेशन' के लिए हरी झंडी दिखा दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य केवल सैन्य विजय नहीं, बल्कि ईरान के भूमिगत ठिकानों में छिपे यूरेनियम के भंडार पर कब्जा करना है। सैन्य अधिकारियों ने ट्रंप के समक्ष जो ब्लूप्रिंट पेश किया है, उसके तहत हजारों जांबाज कमांडो को ईरानी सीमा के भीतर उतारा जाएगा। इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए वहां नई एयरस्ट्रिप बनानी होंगी और भारी सैन्य मशीनरी को दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचाना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन के नीचे गहराई में दबे यूरेनियम को सुरक्षित निकालना अमेरिका के लिए अब तक की सबसे बड़ी और खतरनाक चुनौती साबित हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति को दो धड़ों में बांट दिया है। एक तरफ जहां ज़रीफ़ की सलाह को ईरान के लिए सम्मानजनक निकास (Honorable Exit) के रूप में देखा जा रहा है, वहीं ट्रंप की आक्रामक रणनीति ने खाड़ी देशों सहित पूरी दुनिया की सांसें अटका दी हैं। यह युद्ध अब केवल दो देशों की वर्चस्व की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु हथियारों की होड़ का केंद्र बन चुका है। यदि आगामी कुछ दिनों में कूटनीतिक बातचीत का कोई ठोस रास्ता नहीं निकला, तो ट्रंप का यह 'ग्राउंड ऑपरेशन' मध्य पूर्व के नक्शे को हमेशा के लिए बदल सकता है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि दुनिया शांति की ओर बढ़ेगी या फिर एक अनियंत्रित सैन्य टकराव के गर्त में गिर जाएगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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