Trump order Strait of Hormuz Iran mines : वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती तल्खी अब बारूदी मोड़ पर पहुँच चुकी है, जहाँ एक छोटी सी चिंगारी विश्व अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा कही जाने वाली होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को युद्ध के मैदान में बदल सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अमेरिकी नौसेना को 'शूट टू किल' का स्पष्ट निर्देश दिया है। ट्रंप का यह फरमान उन ईरानी नौकाओं के लिए काल का संकेत है, जो होर्मुज के सामरिक जलक्षेत्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने का दुस्साहस करेंगी। राष्ट्रपति के इस आदेश ने न केवल खाड़ी क्षेत्र में सैन्य हलचल बढ़ा दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी अनिश्चितता के बादल गहरा दिए हैं। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित वार्ता के दूसरे दौर पर टिकी थीं, लेकिन अब शांति की मेज से पहले युद्धपोतों की गर्जना तेज होती सुनाई दे रही है।

इस बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में उभरता दिखाई दे रहा है। इस्लामाबाद में गुरुवार को एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अमेरिकी उप राजदूत नताली बेकर से मुलाकात की। इस गुप्त और महत्वपूर्ण चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर को फिर से पटरी पर लाना था। नकवी ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा सीजफायर को आगे बढ़ाने की पहल का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया। पाकिस्तान इस समय दोतरफा दबाव में काम कर रहा है, जहाँ वह एक ओर अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को संतुलित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अपने पड़ोसी देश ईरान के साथ भी संवाद के रास्ते खुले रखने की कोशिश में जुटा है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर इस शांति प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। इस्लामाबाद में संभावित शांति वार्ता को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं, जो इस बात का संकेत है कि कूटनीतिक गलियारों में कुछ बड़ा पक रहा है। हालांकि, कूटनीति के इन प्रयासों के समानांतर, होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है, और यहाँ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। अमेरिकी नौसेना को दिया गया ट्रंप का ताजा निर्देश यह स्पष्ट करता है कि वाशिंगटन अब अपनी समुद्री सीमाओं और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता करने के मूड में नहीं है।


भविष्य के गर्भ में यह सवाल छिपा है कि क्या नकवी और बेकर की यह मुलाकात बारूदी सुरंगों की जगह शांति के बीज बो पाएगी? एक तरफ ट्रंप के आक्रामक आदेश युद्ध की पटकथा लिख रहे हैं, तो दूसरी तरफ इस्लामाबाद में जारी कूटनीतिक मैराथन शांति की आखिरी उम्मीद जगाए हुए है। यदि ईरान की ओर से रचनात्मक प्रतिक्रिया नहीं आती है, तो होर्मुज की लहरें शांति की जगह बारूद की गंध से भर सकती हैं। आने वाले कुछ दिन न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की भू-राजनीतिक दिशा तय करेंगे, जहाँ विकास और विनाश के बीच का अंतर केवल एक 'ट्रिगर' की दूरी पर टिका है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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