Trump U-turn on British troops : अंतरराष्ट्रीय राजनीति के मंच पर अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। अफगानिस्तान युद्ध में सहयोगी देशों की भूमिका पर विवादास्पद टिप्पणी करने के बाद, वैश्विक दबाव और कूटनीतिक तनाव को देखते हुए ट्रंप ने अपने रुख में बड़ा बदलाव किया है। फॉक्स न्यूज को दिए गए एक साक्षात्कार में नाटो सहयोगियों की वीरता पर सवाल उठाने वाले ट्रंप अब कसीदे पढ़ते नजर आ रहे हैं। उन्होंने ब्रिटिश सैनिकों के बलिदान का सम्मान करते हुए उन्हें 'सभी योद्धाओं में सबसे महान' करार दिया है।

विवाद की शुरुआत तब हुई जब ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान दावा किया कि 9/11 हमले के बाद अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ जारी जंग में ब्रिटेन और नाटो के सैनिक 'अग्रिम मोर्चे' से पीछे हटकर अपना बचाव कर रहे थे। इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। विशेष रूप से ब्रिटेन और डेनमार्क जैसे सहयोगी देशों ने इसे अपने उन सैनिकों का अपमान माना जिन्होंने अफगानिस्तान की धरती पर अपनी जान गंवाई थी।

वैश्विक प्रतिक्रिया और कूटनीतिक दबाव :

ट्रंप के इस बयान पर मित्र देशों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं:

ब्रिटेन का कड़ा रुख: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप की टिप्पणी को 'भयानक' करार दिया और स्पष्ट किया कि ब्रिटिश सैनिकों ने मोर्चे पर डटकर मुकाबला किया है। उन्होंने ट्रंप से इस बयान के लिए माफी की मांग की।

डेनमार्क की आपत्ति: डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्शन ने भी कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की और मित्र देशों के बलिदान को कम आंकने के प्रयासों की निंदा की।

शहादत का आंकड़ा: कूटनीतिक जानकारों ने याद दिलाया कि अफगानिस्तान संघर्ष के दौरान अकेले ब्रिटेन के 457 सैनिकों ने वीरगति प्राप्त की थी, जो अग्रिम मोर्चे पर उनकी सक्रिय भागीदारी का प्रमाण है।

सराहना के साथ 'डैमेज कंट्रोल' :

चौतरफा आलोचना और अपने सबसे करीबी सहयोगियों के साथ बढ़ते मनमुटाव को देखते हुए, राष्ट्रपति ट्रंप ने नरम रुख अपनाना ही बेहतर समझा। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा की। इस नई पोस्ट में उन्होंने ब्रिटिश सेना की जमकर तारीफ की और अपने पिछले बयान से पैदा हुई कड़वाहट को कम करने की कोशिश की। ट्रंप का यह यू-टर्न उनकी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति और सहयोगी देशों के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद को दर्शाता है।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि वैश्विक राजनीति में शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि ट्रंप ने अब 'लव यू ऑल' और प्रशंसा भरे शब्दों से स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन सहयोगी देशों के बीच पैदा हुआ अविश्वास का भाव इतनी जल्दी शांत होगा या नहीं, यह भविष्य के गर्त में है। इस प्रकरण ने एक बार फिर नाटो गठबंधन के भीतर आंतरिक तालमेल और ऐतिहासिक बलिदानों के प्रति सम्मान की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

Next Story