Donald Trump 48 hour ultimatum to Iran : वाशिंगटन और तेहरान के बीच दहकती जंग अब एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहाँ से वापसी के सारे रास्ते बंद नजर आ रहे हैं। पिछले 36 दिनों से जारी इस भीषण संघर्ष के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे कठोर और अंतिम चेतावनी दे डाली है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि ईरान ने तय समय सीमा के भीतर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को व्यापार के लिए नहीं खोला, तो अमेरिका उस पर कहर बनकर टूटेगा। ट्रूथ सोशल पर साझा किए गए अपने एक संदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने हुंकार भरते हुए लिखा कि वक्त की रेत बहुत तेजी से फिसल रही है और अब समझौते के लिए ईरान के पास महज 48 घंटों का समय शेष बचा है।

युद्ध के इस भयावह माहौल में ट्रंप का यह अल्टीमेटम वैश्विक राजनीति में हड़कंप मचाने वाला है। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में उस 10 दिन की रियायत का जिक्र किया, जो उन्होंने ईरान को कूटनीतिक बातचीत और रास्ते को खोलने के लिए दी थी। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने सद्भावना दिखाते हुए इस समय सीमा को बढ़ाकर 6 अप्रैल तक कर दिया था और वादा किया था कि इस दौरान अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान ने इस अमेरिकी प्रस्ताव को पूरी तरह 'अनुचित और एकतरफा' करार देते हुए ठुकरा दिया, जिसने आग में घी डालने का काम किया है। अब 6 अप्रैल की समय सीमा नजदीक आते ही ट्रंप का तेवर और अधिक आक्रामक हो गया है।

फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने खुलासा किया कि तेहरान के अधिकारियों ने उनके प्रशासन से संपर्क कर कूटनीतिक चर्चा के लिए अतिरिक्त समय की गुहार लगाई थी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने बहुत ही विनम्रता से थोड़ा और वक्त मांगा था, लेकिन अब धैर्य जवाब दे रहा है। उन्होंने सीधी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 48 घंटों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट पर लगा प्रतिबंध नहीं हटाया गया, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान के बिजली घरों और बुनियादी ढांचों को नेस्तनाबूद कर देगी। यह धमकी उस वक्त आई है जब होर्मुज को लेकर ट्रंप के बयानों में लगातार बदलाव देखा गया है। कभी वे नाटो देशों को इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने की नसीहत देते हैं, तो कभी वे दो टूक कहते हैं कि अमेरिका को अब इस रास्ते से तेल की कोई जरूरत नहीं है।

दरअसल, ट्रंप का यह दबाव उन देशों पर भी है जो इस समुद्री मार्ग से होने वाली तेल आपूर्ति पर निर्भर हैं, लेकिन युद्ध के मैदान में अमेरिका का साथ देने से कतरा रहे हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से ही ईरान ने होर्मुज की घेराबंदी कर दी है, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतों और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है। अब पूरी दुनिया की नजरें 6 अप्रैल की उस समय सीमा पर टिकी हैं, जिसके खत्म होने के बाद खाड़ी देशों में बारूद का नया दौर शुरू हो सकता है। यह 48 घंटे न केवल ईरान का भविष्य तय करेंगे, बल्कि यह भी निर्धारित करेंगे कि क्या दुनिया एक और महायुद्ध की विभीषिका की ओर बढ़ रही है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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