एच-1बी वीजा पर सख्ती; व्हाइट हाउस ने दोहराया ‘अमेरिका फर्स्ट’
व्हाइट हाउस ने एक बार फिर दोहराया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एच-1बी वीज़ा नीति का मकसद अमेरिकी नागरिकों को नौकरी में प्राथमिकता देना है। सरकार ने साफ कहा वीज़ा सुधार के खिलाफ दायर मुकदमों का अदालत में डटकर मुकाबला किया जाएगा।

अमेरिका में एच-1बी वीज़ा नीति को लेकर जारी विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने एक बार फिर साफ किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वीज़ा सुधार योजना का मकसद अमेरिकी नागरिकों को नौकरी में प्राथमिकता देना है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस नीति के खिलाफ दायर मुकदमों का अदालत में पूरा विरोध किया जाएगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप का लक्ष्य हमेशा से अमेरिकी कामगारों को पहले रखना रहा है। एच-1बी वीज़ा सिस्टम में लंबे समय से धोखाधड़ी और दुरुपयोग की शिकायतें रही हैं, जिनकी वजह से अमेरिकी मजदूरी पर असर पड़ा है। नई नीतियों के ज़रिए राष्ट्रपति इस व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाना चाहते हैं। ये कदम कानूनी हैं और अदालत में इनका मजबूती से बचाव किया जाएगा।”
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने एच-1बी वीज़ा से जुड़ी नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें आवेदन शुल्क 1 लाख डॉलर तय किया गया है, हालांकि कुछ श्रेणियों को इससे राहत दी गई है। उदाहरण के तौर पर, जो छात्र एफ-1 वीज़ा से एच-1बी वीज़ा में बदल रहे हैं या जो पहले से अमेरिका में रहकर वीज़ा विस्तार के लिए आवेदन कर रहे हैं, उन्हें यह भारी फीस नहीं देनी होगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान एच-1बी वीज़ा धारकों के लिए कोई नई रोक नहीं लगाई गई है। वे पहले की तरह अमेरिका में आने-जाने या काम करने के लिए स्वतंत्र रहेंगे। नई नीति केवल नए आवेदकों पर लागू होगी, जो इस समय अमेरिका के बाहर हैं और जिनके पास वैध वीज़ा नहीं है।
इस बीच, यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स, जो देश का सबसे बड़ा व्यापार संगठन है, ने इन नए नियमों के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। संगठन का कहना है कि इतनी ऊँची फीस लगाने से अमेरिकी कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जिससे या तो उन्हें कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने पड़ेंगे या फिर कुशल विदेशी पेशेवरों की भर्ती घटानी पड़ेगी।
इससे पहले भी कई शैक्षणिक संस्थान और यूनियनें अक्टूबर में ट्रंप प्रशासन की वीज़ा नीतियों को अदालत में चुनौती दे चुकी हैं। वहीं, सितंबर में नीति पर हस्ताक्षर करते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, “हमारा लक्ष्य साफ है — अमेरिकी नौकरियां अमेरिकी लोगों के लिए।”
नई नीति को लेकर बहस जारी है — एक ओर प्रशासन इसे “अमेरिकी कामगारों के हित में ज़रूरी सुधार” बता रहा है, वहीं उद्योग जगत इसे “वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए खतरा” मान रहा है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
