Gautam Adani case : BMC Election के चलते अभी कुछ दिनों से 'गौतम अडानी' यह एक चर्चा का विषय बना हुआ है. यह सिलसिला महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के शिवजी पार्क में हुए भाषण से जारी है. साथ ही स्थानीय राजनीती से लेके अंरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी चर्चाए जारी है। ऐसे में ही सुत्रों के अनुसार खबर आयी है की गौतम अडानी के रिश्वतखोरी के खिलाफ अमेरिका ने भी कड़ा रुख अपनाना शुरू किया है। इसके चलते यह प्रश्न उपस्थित होता है की, क्या सच में भारत भी 'अडाणी' नामक रिश्वतखोरी के आगोश में दस्ता चला जा रहा है ? तो चलिए जानते है पूरी खबर विस्तार से।

अमेरिका और भारत के बीच कानूनी-कूटनीतिक प्रक्रियाओं के बीच भारतीय अरबपति गौतम अदानी से जुड़ा मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। भारत सरकार द्वारा कथित रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों में दो बार औपचारिक सूचना भेजने से इनकार किए जाने के बाद अमेरिकी अधिकारी अब अदानी को ईमेल के माध्यम से कानूनी समन भेजने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

न्यूयॉर्क की अदालत में एसईसी की अहम अर्जी :

अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने बुधवार को न्यूयॉर्क की एक अदालत से अनुमति मांगी कि वह गौतम अदानी, उनके भतीजे सागर अदानी और उनके कानूनी सलाहकारों से सीधे संपर्क कर सके। यह अनुमति एक औपचारिक शिकायत से जुड़ी है, जिसे एसईसी ने अमेरिकी न्याय विभाग के आपराधिक आरोपों के साथ दायर किया है।

250 मिलियन डॉलर की कथित रिश्वत का आरोप :

एसईसी और अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार:

गौतम अदानी और सागर अदानी पर आरोप है कि उन्होंने

सौर ऊर्जा से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपये) से अधिक की रिश्वत देने की कोशिश की।

सागर अदानी अदानी समूह की नवीकरणीय ऊर्जा इकाई में कार्यकारी निदेशक हैं।

आरोप है कि इस कथित योजना को अमेरिकी बैंकों और निवेशकों से छिपाया गया, जिनसे अदानी समूह ने अरबों डॉलर की फंडिंग जुटाई।

शेयर बाजार में दिखा असर :

अमेरिकी आरोपों की खबर सामने आते ही शुक्रवार को मुंबई शेयर बाजार में अदानी समूह की कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई:

  • अदानी एंटरप्राइजेज: 7.9% की गिरावट
  • अदानी पोर्ट्स: 5.9% नीचे
  • अदानी ग्रीन एनर्जी: 10.3% तक लुढ़की
  • भारत-अमेरिका कानूनी टकराव की जटिलता

एसईसी ने अपनी अदालत में दाखिल याचिका में कहा कि :

  • भारत डाक या व्यक्तिगत डिलीवरी के जरिए विदेशी कानूनी नोटिस की अनुमति नहीं देता।
  • 17 फरवरी 2025 को हेग कन्वेंशन के तहत भारत से औपचारिक सहयोग का अनुरोध किया गया था।
  • इसके बावजूद भारत के कानून मंत्रालय ने समन तामील से इनकार कर दिया।
  • भारत ने यह भी संकेत दिया कि एसईसी के पास हेग कन्वेंशन लागू कराने का अधिकार नहीं है।
  • एसईसी का तर्क है कि प्रतिवादियों को पहले से मुकदमे की जानकारी है, क्योंकि: सार्वजनिक बयान दिए जा चुके हैं, नियामक फाइलिंग हो चुकी हैऔर अमेरिका में बड़े लॉ फर्मों की नियुक्ति की गई है।
  • इस आधार पर ईमेल के जरिए समन भेजना “प्रभावी सूचना” माना जाना चाहिए।

राजनीतिक और वैश्विक पृष्ठभूमि :

ये आरोप अमेरिका में जो बाइडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम दौर में सामने आए थे। इससे पहले यह अटकलें थीं कि डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण और विदेशी भ्रष्टाचार निवारण कानून में संभावित नरमी के बाद मामले ठंडे पड़ सकते हैं।

हालांकि, रूस से तेल खरीद और व्यापार शुल्क को लेकर भारत-अमेरिका संबंधों में आई तल्खी ने हालात को और जटिल बना दिया।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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