Trump signs Peace Charter Davos : विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बर्फीले शिखर पर गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को एक ऐसा कूटनीतिक मंजर दिखा, जिसने दुनिया भर के रणनीतिकारों को चौंका दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा से लेकर वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए अपने महत्वाकांक्षी 'बोर्ड ऑफ पीस' (Board of Peace) का औपचारिक ऐलान किया। इस भव्य समारोह में जहाँ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ट्रंप के बगल में खड़े होकर 'मुस्कुराते इशारे' कर रहे थे, वहीं भारत, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे प्रमुख देशों की अनुपस्थिति ने एक गहरी कूटनीतिक खामोशी दर्ज की है।

मंच पर 'फुसफुसाहट' और रहस्यमयी इशारे :

दावोस के मुख्य मंच पर जब ट्रंप 'बोर्ड ऑफ पीस' के चार्टर पर हस्ताक्षर कर रहे थे, तब एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। हस्ताक्षर के दौरान पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप के करीब जाकर उनके कान में कुछ फुसफुसाया। इसके तुरंत बाद दोनों नेताओं ने सामने बैठी भीड़ और कैमरों की ओर इशारा किया और खिलखिलाकर हंस पड़े।

  • कूटनीतिक चर्चा: विश्लेषकों का मानना है कि यह 'इशारा' दक्षिण एशियाई राजनीति या भारत की अनुपस्थिति पर कोई कटाक्ष हो सकता है।
  • शहबाज की सक्रियता: आर्थिक बदहाली से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए ट्रंप का साथ एक लाइफलाइन की तरह है, यही वजह है कि शरीफ पूरे समारोह के दौरान ट्रंप के बेहद करीब दिखने का प्रयास करते रहे।

भारत की 'वेट एंड वॉच' नीति और अन्य नदारद देश :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बोर्ड में शामिल होने का विशेष निमंत्रण मिला था, लेकिन भारत ने फिलहाल इस समारोह से दूरी बनाए रखी। भारत का रुख 'दो-राष्ट्र समाधान' (Two-State Solution) पर अडिग है और वह किसी ऐसे बोर्ड का हिस्सा बनने में जल्दबाजी नहीं करना चाहता जिसका स्वरूप और अधिकार क्षेत्र अभी स्पष्ट नहीं है।

  • प्रमुख अनुपस्थित देश: भारत के साथ-साथ फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और चीन जैसे देशों ने भी इस अनावरण समारोह से दूरी बनाई।
  • संशय की वजह: यूरोपीय देशों को डर है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) की शक्तियों को कम करने या उसके 'प्रतिद्वंद्वी' के रूप में उभरने का एक अमेरिकी प्रयास हो सकता है।

क्या है 'शांति बोर्ड' का असली उद्देश्य ?

ट्रंप ने अपने संबोधन में इसे "दुनिया की सबसे अनोखी पहल" करार दिया। हालांकि शुरुआत में इसे गाजा के पुनर्निर्माण और शासन के लिए बनाया गया था, लेकिन चार्टर के शब्द इसे एक वैश्विक संस्था के रूप में पेश करते हैं।

  • सदस्य देश: अर्जेंटीना, पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, मिस्र और वियतनाम जैसे देशों ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
  • बजट और संरचना: रिपोर्टों के अनुसार, इसके स्थायी सदस्यों के लिए भारी निवेश की बात भी कही गई है और यह बोर्ड सीधे व्हाइट हाउस के मार्गदर्शन में काम करेगा।
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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