आइसलैंड, जिसे हमेशा मच्छर-मुक्त देश माना जाता था, अब इस रिकॉर्ड को खो चुका है। वैज्ञानिकों ने देश में पहली बार खुले वातावरण में मच्छरों की मौजूदगी की पुष्टि की है। यह खोज पश्चिमी आइसलैंड के कीडाफेल इलाके में हुई, जो राजधानी रेकजाविक से लगभग 20 मील उत्तर में स्थित है। यहां तीन मच्छर — दो मादा और एक नर — पाए गए, जिन्हें 'कुलिसेटा एन्नुलाटा' (Culiseta annulata) नामक प्रजाति का बताया गया है। यह एक ठंड-सहनशील मच्छर प्रजाति है, जो यूरोप और एशिया के उत्तरी हिस्सों में पाई जाती है।

यह खोज वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है क्योंकि अब तक आइसलैंड का बेहद ठंडा मौसम मच्छरों के प्रजनन के लिए प्रतिकूल माना जाता था। पिछले वर्षों में तापमान में बढ़ोतरी और लंबे गर्म मौसम ने वहां की पारिस्थितिकी को प्रभावित किया है, जिससे ऐसे कीट अब जीवित रह पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग की वजह से दुनिया के ठंडे इलाकों में भी अब ऐसे कीट फैलने लगे हैं, जो पहले यहाँ संभव नहीं था।

मच्छरों की यह खोज स्थानीय व्यक्ति ब्योर्न ह्याल्टासन (Björn Hjaltason) ने की, जो कीटों में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने अपने घर के पास एक अजीब उड़ती हुई मक्खी जैसी चीज़ देखी और तुरंत उसे पकड़ लिया। बाद में उन्होंने तस्वीरें सोशल मीडिया के एक समूह में साझा कीं।

उनकी जानकारी मिलने पर आइसलैंड के नेचुरल साइंस इंस्टीट्यूट के कीट विशेषज्ञ मैथियास अल्फ्रेडसन मौके पर पहुंचे और जांच में पाया कि यह वाकई मच्छर ही है। दोनों ने मिलकर तीन मच्छरों को पकड़ा और लैब में उनकी पहचान की पुष्टि की।

अल्फ्रेडसन ने बताया कि यह मच्छर प्रजाति ठंड में जीने के लिए अनुकूल है। इससे पहले भी आइसलैंड में हवाई अड्डे या जहाजों पर कुछ मच्छर दिखाई दिए थे, लेकिन खुले वातावरण में इनका पाया जाना पहली बार हुआ है। वैज्ञानिकों को अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये मच्छर यहां कैसे पहुंचे—कई का कहना है कि यह किसी जहाज या स्टोरेज कंटेनर के ज़रिए देश में आ सकते हैं।

जलवायु विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह प्रवृत्ति जारी रही, तो आइसलैंड जैसे ठंडे क्षेत्रों में भी भविष्य में डेंगू या मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि अभी फिलहाल ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। फिलहाल, इन तीन मच्छरों का संग्रह वैज्ञानिक संस्थान में किया गया है, ताकि आने वाले महीनों में उनके अध्ययन से यह समझा जा सके कि वे यहां कैसे जीवित रह पाए।

अब वैज्ञानिकों की टीम इस बात पर निगरानी रखेगी कि क्या यह प्रजाति आइसलैंड की सर्दी झेलकर अगले साल तक जीवित रह सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह मच्छरों की एक नई स्थायी आबादी बनने की शुरुआत हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह घटना जलवायु परिवर्तन के उस व्यापक असर का एक और प्रमाण है, जो अब धरती के सबसे ठंडे इलाकों को भी बदल रहा है।



Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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