सऊदी अरब के इतिहास के एक सदी से भी अधिक समय के साक्षी रहे और देश के 'सबसे बुजुर्ग व्यक्ति' माने जाने वाले शेख अल वदाई (Al Wadaei) का 11 जनवरी, 2026 को रियाद में निधन हो गया। 142 वर्ष की कथित आयु में दुनिया को अलविदा कहने वाले अल वदाई का जाना केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसने अरब प्रायद्वीप को रेगिस्तान के कबीलों से एक आधुनिक विश्व शक्ति में बदलते देखा था। उनके निधन की खबर से पूरे दक्षिण सऊदी क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

रेगिस्तान से राजमहलों तक: 19वीं सदी से 21वीं सदी का सफर

रिपोर्ट्स के अनुसार, अल वदाई का जन्म लगभग 1884 में सऊदी अरब के दक्षिणी क्षेत्र 'धहरान अल-जनूब' (Dhahran Al Janub) में हुआ था। यह वह दौर था जब आधिकारिक जन्म प्रमाण पत्रों का चलन शुरू भी नहीं हुआ था। उनका जीवन सऊदी अरब के एकीकरण और विकास की एक जीवंत समयरेखा था।

शेख अल वदाई ने अपने जीवनकाल में सऊदी अरब के सभी राजाओं का शासन देखा। 1932 में संस्थापक राजा अब्दुलअजीज द्वारा आधुनिक सऊदी अरब की स्थापना से लेकर वर्तमान राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज के शासन तक, वे हर ऐतिहासिक परिवर्तन के गवाह रहे। एक साधारण जीवन व्यतीत करते हुए भी, उनका अस्तित्व देश की विरासत का प्रतीक बन गया था।

विरासत और परिवार: 134 वंशजों का वटवृक्ष

अल वदाई का व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन भी उतना ही विशाल था जितनी उनकी उम्र। उन्होंने अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ा है। उनके जीवन के प्रमुख पहलू इस प्रकार रहे:

  • परिवार: कई विवाहों के बाद, अल वदाई अपने पीछे 134 बच्चे और पोते-पोतियों (Grandchildren) को छोड़ गए हैं।
  • धार्मिक निष्ठा: इस्लाम के प्रति उनकी अगाध श्रद्धा थी। उन्होंने अपने जीवनकाल में 40 से अधिक बार हज (Hajj) यात्रा की, जो शारीरिक और आत्मिक शक्ति का प्रमाण है।
  • सामाजिक योगदान: वृद्धावस्था में भी वे सामाजिक रूप से सक्रिय रहे। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे नियमित रूप से मस्जिद जाते थे और स्थानीय विवादों में एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाते थे, जहाँ उनकी राय को अंतिम माना जाता था।

उम्र के प्रमाण और आधिकारिक रिकॉर्ड

हालाँकि उनका परिवार और स्थानीय समुदाय उनकी उम्र 142 वर्ष बताता है, लेकिन इसे आधिकारिक रूप से 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' द्वारा मान्यता नहीं मिली थी। इसका मुख्य कारण 19वीं सदी के अंत में सऊदी अरब के दूरदराज के इलाकों में जन्म पंजीकरण की औपचारिक व्यवस्था का न होना था। फिर भी, स्थानीय प्रशासन और लोगों के लिए वे किसी दस्तावेज से परे एक जीवित किंवदंती थे।

अंतिम विदाई में उमड़ी भीड़

शेख अल वदाई के कद का अंदाजा उनकी अंतिम यात्रा से लगाया जा सकता है। धहरान अल-जनूब में आयोजित उनके जनाजे में 7,000 से अधिक लोग शामिल हुए। इसमें स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, उनके विशाल परिवार के सदस्य और आम नागरिक शामिल थे, जो इस ऐतिहासिक व्यक्ति को श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे।

शेख अल वदाई का निधन सऊदी अरब की पुरानी पीढ़ी और नई दुनिया के बीच की एक और कड़ी का टूट जाना है। 1884 से 2026 तक का उनका सफर संघर्ष, बदलाव और आस्था की एक अनकही कहानी है। भले ही उनकी उम्र के आंकड़े फाइलों में दर्ज न हों, लेकिन 7,000 लोगों की उपस्थिति और 134 वंशजों की विरासत यह बताने के लिए काफी है कि उन्होंने एक पूर्ण और प्रभावशाली जीवन जिया।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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