China Fuel Supply Security : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष ने अब पूरी दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। जैसे-जैसे युद्ध की लपटें तेज हो रही हैं, वैश्विक तेल आपूर्ति की अनिश्चितता ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा दिया है। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन ने एक ऐसा कड़ा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक ऊर्जा समीकरणों को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है। चीन ने अपने घरेलू बाजार को सुरक्षित करने के लिए रिफाइंड तेल के निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

चीन का 'एनर्जी शील्ड' और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर :

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, चीन की शीर्ष आर्थिक नियोजन संस्था, नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) ने एक आपातकालीन निर्देश जारी किया है। इस आदेश के तहत मार्च महीने के लिए गैसोलीन, डीजल और एविएशन फ्यूल (हवाई ईंधन) के सभी विदेशी शिपमेंट पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया गया है। बीजिंग का यह रणनीतिक निर्णय ऐसे समय में आया है जब 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गई हैं। चीन का प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में होने वाली वृद्धि का असर उसके घरेलू ईंधन भंडार और अर्थव्यवस्था पर न पड़े।

वैश्विक प्रतिक्रिया: 1973 के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट?

ईरान और इजरायल के बीच 28 फरवरी को शुरू हुए हवाई हमलों के बाद से तेल की किल्लत का डर गहरा गया है। इस स्थिति से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं:

  • IEA का आपातकालीन कदम: इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने घोषणा की है कि उसके सदस्य देश वैश्विक बाजार को स्थिर करने के लिए अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करेंगे। यह 1973 के ऐतिहासिक तेल संकट के बाद छठा मौका है जब आईईए को इस तरह का बड़ा हस्तक्षेप करना पड़ा है।
  • अमेरिका का रणनीतिक दांव: संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी अपने सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल बाजार में उतारने का निर्णय लिया है, ताकि कीमतों में आ रहे उछाल को नियंत्रित किया जा सके।

युद्ध का गहराता साया और आपूर्ति श्रृंखला

वेस्ट एशिया में तनाव को अब लगभग दो सप्ताह बीत चुके हैं। इजरायली बमबारी और ईरानी प्रतिरोध के बीच समुद्र के रास्ते होने वाली तेल की सप्लाई लाइनें लगभग ठप होने की कगार पर हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और लंबा खिंचता है, तो केवल कीमतों में बढ़ोतरी ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर ईंधन का राशनिंग (Rationing) शुरू होने की नौबत आ सकती है। चीन जैसे देशों द्वारा निर्यात रोकना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि दुनिया अब एक लंबे और कठिन ऊर्जा शीत युद्ध की तैयारी कर रही है।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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