ईरान ने चीन से खरीदे रबर के टैंक और विमान... अमेरिका के करोड़ों की मिसाइले बर्बाद करने का बजट फ्रेंडली तरीका
ईरान के नकली सैन्य उपकरणों ने अमेरिकी सेना के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। रबर के टैंकों और पेंट की गई विमान आकृतियों के जरिए ईरान ने करोड़ों की मिसाइलों को बेकार कर 'मिलिट्री डेकॉय' तकनीक का सफल प्रदर्शन किया। जानिए कैसे इन्फ्लेटेबल हथियारों और रणनीतिक छलावे से ईरान अपनी असली सैन्य शक्ति को दुश्मनों के हमलों से बचा रहा है।

तेहरान। सैन्य विज्ञान की दुनिया में 'मिलिट्री डेकॉय' यानी सैन्य छलावे की तकनीक ने आधुनिक युद्ध के समीकरणों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिकी सेना और उसके सहयोगियों को भ्रमित करने के लिए भारी संख्या में नकली सैन्य उपकरणों का जाल बिछाया है। यह जानकारी पूरी तरह निराधार नहीं है, हालांकि आंकड़ों को लेकर अलग-अलग दावे हो सकते हैं, लेकिन ईरान द्वारा 'इन्फ्लेटेबल' यानी हवा से भरने वाले टैंक, मिसाइल लॉन्चर और रडार सिस्टम का सार्वजनिक प्रदर्शन इस रणनीतिक चालाकी की पुष्टि करता है। रबर और प्लास्टिक से निर्मित ये डमी उपकरण दिखने में इतने असली हैं कि दुश्मन की अत्याधुनिक तकनीक भी धोखा खा जाए।
ईरान की इस कूटनीति का प्राथमिक उद्देश्य अमेरिकी सेना या इजरायल जैसे शत्रुओं के बहुमूल्य समय और अरबों डॉलर के संसाधनों को नष्ट करना है। रणनीतिक रूप से, यदि अमेरिका 2 मिलियन डॉलर की एक महंगी मिसाइल महज 500 डॉलर के रबर के गुब्बारे वाले टैंक पर दागता है, तो यह उसका एक बड़ा आर्थिक और सैन्य नुकसान माना जाता है। इसके अतिरिक्त, ये नकली उपकरण अंतरिक्ष में तैनात सैटेलाइट्स और निगरानी करने वाले ड्रोन्स को भी भ्रमित करते हैं, जिससे दुश्मन की नजर में ईरान की सैन्य शक्ति वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक विशाल प्रतीत होती है। इस धोखे का सबसे बड़ा लाभ यह है कि हमले के दौरान ईरान के असली टैंक और मिसाइलें सुरक्षित बच जाती हैं, जबकि दुश्मन केवल छद्म ठिकानों को ही निशाना बना पाता है।
वर्ष 2025-26 के हालिया संघर्षों के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि ईरान ने अपने हवाई अड्डों पर लड़ाकू विमानों की 'सिलहूट्स' यानी जमीन पर पेंट की गई आकृतियां बनाई थीं, ताकि सैटेलाइट इमेजरी को सटीक जानकारी न मिल सके। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान कई बार इन नकली लक्ष्यों को ही निशाना बनाया गया, जिससे मुख्य सैन्य संपत्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ। हालांकि, सैन्य छलावे की यह नीति केवल ईरान तक सीमित नहीं है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की 'घोस्ट आर्मी' और वर्तमान रूस-यूक्रेन युद्ध में लकड़ी व रबर से बने 'फेक HIMARS' का उपयोग इस बात का प्रमाण है कि यह एक सफल और ऐतिहासिक युद्ध नीति है। युद्ध के मैदान में भौतिक शक्ति से अधिक अब रणनीतिक धोखे और तकनीकी भ्रम की भूमिका निर्णायक होती जा रही है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
