Iran US sanctions : मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान पर नए प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तेहरान ने वॉशिंगटन को सीधी और कड़ी चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर कोई सैन्य हमला किया, तो उसका जवाब मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दिया जाएगा। इस बयान से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है।

शनिवार, 7 फरवरी 2026 को सामने आए इस बयान में अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी ठिकानों पर संभावित कार्रवाई को उन देशों के खिलाफ कदम के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, जिनकी जमीन पर ये ठिकाने स्थित हैं। ईरान का कहना है कि उसका निशाना केवल अमेरिकी सैन्य ढांचे होंगे।

परमाणु वार्ता के बीच आई धमकी :

यह बयान ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही ओमान की मध्यस्थता में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच अप्रत्यक्ष परमाणु वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी थी। शुक्रवार, 6 फरवरी 2026 को हुई इस बातचीत को दोनों पक्षों ने सकारात्मक बताया था। इसके बावजूद अगले ही दिन ईरान की ओर से आई यह धमकी हालात की नाजुकता को दर्शाती है।

अगली बातचीत की तारीख तय नहीं :

अल जजीरा टीवी को दिए इंटरव्यू में अराघची ने कहा कि अमेरिका के साथ अगली बातचीत की तारीख अभी तय नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह बातचीत अगले सप्ताह की शुरुआत में हो सकती है। अराघची के मुताबिक, दोनों पक्ष मानते हैं कि संवाद जल्द शुरू होना चाहिए।

ट्रंप की सख्ती और सैन्य चेतावनी :

इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसैनिकों की तैनाती बढ़ाने की घोषणा की है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान से यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम इनरिचमेंट) बंद करने की मांग दोहराई है, जिसे परमाणु हथियार निर्माण की दिशा में अहम कदम माना जाता है।

अमेरिका ने ईरान से यह भी मांग की है कि वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक लगाए और क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना बंद करे। वहीं, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका सैन्य इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं है।

क्यों अहम है यह घटनाक्रम :

  • नए US प्रतिबंधों के बाद ईरान की सीधी सैन्य चेतावनी
  • परमाणु वार्ता के बीच बयानबाजी से बढ़ी अनिश्चितता
  • मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा पर सवाल

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी ने एक बार फिर वैश्विक समुदाय की नजरें मध्य पूर्व पर टिका दी हैं। आने वाले दिनों में बातचीत आगे बढ़ती है या टकराव गहराता है, यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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