क्या मिडिल ईस्ट का तनाव रोक पाएगी दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया बैठक? जाने विस्तार से
सियोल में होने वाली इस उच्च-स्तरीय वार्ता का उद्देश्य रक्षा सहयोग को मजबूत करना और होर्मुज स्ट्रेट तनाव के बीच वैश्विक सप्लाई चेन को स्थिर करना है। पढ़े पूरा रिपोर्ट

दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन (बाएं) और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग (दाएं) सियोल में द्विपक्षीय वार्ता के दौरान हाथ मिलाते हुए।
Middle East Crisis : पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट की पदचाप के बीच दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ी घेराबंदी शुरू कर दी है। सोमवार को दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार, इस सप्ताह के अंत में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के लिए मेज पर होंगे। इस रणनीतिक संवाद का मुख्य केंद्र न केवल बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष है, बल्कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में आ रही अस्थिरता को रोकना और रक्षा क्षेत्र में साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाना भी है।
दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्युन आगामी गुरुवार को सियोल में अपनी ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग की मेजबानी करेंगे। मंत्रालय द्वारा साझा की गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा सुरक्षा को लेकर आशंकित हैं। दोनों पक्षों के बीच होने वाली इस चर्चा में मिडिल ईस्ट की वर्तमान परिस्थितियों और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आने वाली बाधाओं से निपटने के लिए साझा प्रतिबद्धता को दोहराया जाएगा। साथ ही, रक्षा उद्योग में सहयोग को और अधिक गहरा करने के लिए ठोस रोडमैप तैयार किए जाने की भी प्रबल संभावना है।
योनहाप न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक दोनों नेताओं के बीच पिछले महीने हुई टेलीफोनिक वार्ता का अगला चरण है, जो कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाती है। गौर करने वाली बात यह है कि सियोल केवल ऑस्ट्रेलिया के साथ ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ भी सीधे संवाद में लगा हुआ है। हाल ही में दक्षिण कोरिया के विशेष दूत चुंग ब्युंग-हा ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान चुंग ने उम्मीद जताई थी कि कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से संघर्ष को शांत कर क्षेत्र में स्थिरता बहाल की जा सकती है। उन्होंने सियोल और तेहरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों की बहाली पर भी जोर दिया, जिस पर ईरान ने सकारात्मक रुख दिखाया है।
हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंताएं अभी भी बरकरार हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई पाबंदियों को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी इस तनातनी का सीधा असर दक्षिण कोरिया पर पड़ा है, जिसके २६ जहाज और १७३ क्रू मेंबर वर्तमान में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं। सियोल की इस कूटनीतिक कवायद का एक बड़ा उद्देश्य अपने नागरिकों और जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना भी है। दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया की यह आगामी बैठक केवल दो देशों का संवाद नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट के तनाव से उपजने वाले 'डोमिनो इफेक्ट' को रोकने की दिशा में एक बड़ा वैश्विक प्रयास मानी जा रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
