पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार, 27 जून 2026 को दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए महत्वपूर्ण समझौते में पाकिस्तान की सक्रिय कूटनीतिक भूमिका के बाद देश वैश्विक स्तर पर एक "पीसमेकर" (शांति स्थापित करने वाला राष्ट्र) के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की नई पहचान बनाई है और अब दुनिया पाकिस्तान को क्षेत्रीय स्थिरता तथा संवाद को बढ़ावा देने वाले राष्ट्र के रूप में देख रही है।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान ने पिछले सप्ताह स्विट्जरलैंड में कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई वार्ताओं के बाद अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमति जताई है। यह उच्चस्तरीय बातचीत 18 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हस्ताक्षरित इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत आयोजित की गई थी, जिसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कराची स्थित पाकिस्तान नौसेना अकादमी में कैडेट्स की पासिंग आउट परेड को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की हालिया पाकिस्तान यात्रा इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से दोनों देशों के बीच विश्वास कायम करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अपने संबोधन में शरीफ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से बाहरी और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान को अस्थिर करने के लिए "प्रॉक्सी" का इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने इस आरोप के समर्थन में कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की कूटनीति ने देश की अंतरराष्ट्रीय छवि को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, पहले पाकिस्तान को क्षेत्रीय अस्थिरता से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब उसे शांति और संवाद को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार देश के रूप में पहचान मिल रही है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को देते हुए कहा कि दोनों ने अमेरिका और ईरान के साथ लगातार संवाद बनाए रखा, जिससे वार्ता का माहौल तैयार हुआ और समझौते की दिशा में प्रगति संभव हो सकी।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच सफल वार्ता यह दर्शाती है कि पाकिस्तान वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। उनके अनुसार, पाकिस्तान ने हमेशा टकराव की बजाय बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी है और यही उसकी विदेश नीति की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है।

यह घटनाक्रम पश्चिम एशिया में हाल के सबसे गंभीर तनावों के बाद सामने आया है। संकट तब गहरा गया था जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर सैन्य कार्रवाई की थी। इसके जवाब में ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे अल उदैद एयर बेस पर मिसाइल हमले किए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई थी और वैश्विक तेल आपूर्ति तथा क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई थीं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कई देशों ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए थे।

कई दौर की अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बाद अमेरिका और ईरान सैन्य तनाव कम करने पर सहमत हुए। दोनों पक्षों ने युद्धविराम की रूपरेखा स्वीकार की, राजनयिक संवाद फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई और क्षेत्रीय मध्यस्थ देशों ने आगे किसी भी सैन्य टकराव को रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि यह समझौता पूर्ण शांति संधि नहीं माना जा रहा है, लेकिन इससे तत्काल व्यापक युद्ध का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

पाकिस्तान का दावा है कि उसने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिका और ईरान दोनों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा, खाड़ी देशों के साथ समन्वय स्थापित किया और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा है कि इस्लामाबाद ने अपने मित्र देशों के साथ मिलकर तनाव कम करने और वार्ता को आगे बढ़ाने में सक्रिय सहयोग दिया। हालांकि, पाकिस्तान ने अब तक सार्वजनिक रूप से ऐसे कोई विस्तृत प्रमाण जारी नहीं किए हैं जिनसे उसकी मध्यस्थता की वास्तविक सीमा स्पष्ट हो सके। दूसरी ओर, कतर और ओमान को भी लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले प्रमुख देशों के रूप में व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता रहा है।

शहबाज शरीफ का यह बयान न केवल पाकिस्तान की विदेश नीति की दिशा को रेखांकित करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि इस्लामाबाद स्वयं को क्षेत्रीय संघर्षों के समाधान में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-ईरान समझौते के बाद पाकिस्तान द्वारा स्वयं को वैश्विक "पीसमेकर" के रूप में प्रस्तुत करना आने वाले समय में उसकी अंतरराष्ट्रीय भूमिका और क्षेत्रीय कूटनीतिक महत्व पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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