इस्लामाबाद में US-Iran के बीच दूसरे दौर की 'पीस टॉक'; क्या राष्ट्रपति ट्रंप की एंट्री से खत्म होगा युद्ध?
पाकिस्तान में होने वाली इस वार्ता में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हो सकते हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और युद्ध को टालना है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
US-Iran Peace Talks Islamabad 2026 : युद्ध के मुहाने पर खड़े मध्य पूर्व और समंदर में सुलगती बारूद की गंध के बीच कूटनीति की मेज से एक बड़ी और उम्मीद भरी खबर सामने आ रही है। पाकिस्तानी रक्षा और राजनयिक सूत्रों के हवाले से यह संकेत मिले हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का निर्णायक दूसरा दौर बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को शुरू होने के लिए पूरी तरह तैयार है। रॉयटर्स से बात करते हुए एक उच्च पदस्थ पाकिस्तानी अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर पुष्टि की है कि दोनों महाशक्तियों के बीच संवाद की प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है और 'पीस टॉक' का अगला चरण अपने निर्धारित समय पर ही होगा। यह कूटनीतिक प्रयास ऐसे समय में हो रहा है जब पूरी दुनिया परमाणु युद्ध और ऊर्जा संकट के डर से कांप रही है, जिससे इस्लामाबाद अब वैश्विक राजनीति का केंद्र बन गया है।
इस दूसरे दौर की बातचीत का सबसे चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संभावित भागीदारी है। सूत्रों के अनुसार, यदि बुधवार की बातचीत में किसी ठोस समझौते की रूपरेखा तैयार होती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप स्वयं इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। यह भागीदारी व्यक्तिगत उपस्थिति के माध्यम से या उच्च-स्तरीय वर्चुअल लिंक के जरिए हो सकती है। चूंकि वार्ता का पहला दौर किसी भी सार्थक नतीजे पर पहुंचे बिना समाप्त हो गया था, इसलिए इस बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें दूसरे दौर पर टिकी हैं। कूटनीतिज्ञों का मानना है कि यदि ट्रंप इस समझौते की मेज पर आते हैं, तो यह न केवल तनाव को कम करेगा बल्कि खाड़ी क्षेत्र में दशकों से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता को भी एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।
हालांकि, शांति की इन कोशिशों के पीछे 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में उपजा गहरा सैन्य संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में खड़ा है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा एक ईरानी मालवाहक जहाज को जब्त किए जाने के बाद तेहरान का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ईरान ने इस कार्रवाई को एक सीधा आक्रामक कदम और 'सशस्त्र डकैती' करार दिया है। रिश्तों में आई इस कड़वाहट ने वार्ता की मेज पर बैठे प्रतिनिधियों के लिए कार्य को और अधिक जटिल बना दिया है। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका की समुद्री नाकाबंदी जारी रहती है, तो वह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को पूरी तरह बंद कर देगा। वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह किसी कयामत से कम नहीं होगा क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है।
वार्ता के इस नाजुक मोड़ पर कानूनी और सामरिक स्थितियां अत्यंत जटिल हैं। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय कानून समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता की वकालत करते हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय सुरक्षा और नाकाबंदी जैसे कड़े कदम कूटनीतिक समझौतों की राह मुश्किल कर रहे हैं। इस्लामाबाद में होने वाली इस बैठक का महत्व केवल दो देशों के बीच युद्ध को रोकना नहीं है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करना भी है। यदि कल की वार्ता विफल होती है, तो 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के बंद होने का खतरा न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक आर्थिक महामंदी का कारण बन सकता है। ऐसे में, बुधवार का सूरज यह तय करेगा कि दुनिया शांति की ओर कदम बढ़ाएगी या एक विनाशकारी संघर्ष की आग में झोंक दी जाएगी।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
