आतंकवाद पर 'जीरो टॉलरेंस'; SCO मंच से राजनाथ सिंह का बड़ा ऐलान
अस्ताना में SCO बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का संदेश दिया।

कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह।
Rajnath Singh SCO meeting 2026 : वैश्विक अशांति और खंडित कूटनीतिक माहौल के बीच शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने अपनी रक्षा नीतियों और वैश्विक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर कड़ा और स्पष्ट रुख अख्तियार किया है। कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने न केवल आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' का संकल्प दोहराया, बल्कि दुनिया के शक्तिशाली देशों को आतंकवाद पर अपनाए जाने वाले दोहरे मानदंडों को त्यागने की भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के दौर में जब वैश्विक सहमति कमजोर हो रही है, तब एससीओ जैसे संगठनों की जिम्मेदारी शांति और स्थिरता के लिए और भी बढ़ जाती है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत एससीओ क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को नमन करते हुए की, लेकिन जल्द ही उनका स्वर वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों की ओर मुड़ गया। उन्होंने हाल के वर्षों में जारी युद्धों और मुखर होते मतभेदों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे रक्षा तंत्रों के लिए 'आत्ममंथन' का समय बताया। राजनाथ सिंह ने विशेष रूप से पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले का उल्लेख किया, जिसने पूरी मानवता को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने तर्क दिया कि आतंकवाद का कोई भी रूप या कारण उसे जायज नहीं ठहरा सकता और यह किसी एक देश की नहीं बल्कि संपूर्ण वैश्विक समुदाय की समस्या है।
भारत की सैन्य और रणनीतिक शक्ति का परिचय देते हुए रक्षा मंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन भारत की उस अडिग नीति का प्रमाण है, जो सीमाओं के पार से होने वाले प्रायोजित आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) को जड़ से खत्म करने का सामर्थ्य रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अब दोहरे मानदंडों (Double Standards) के लिए कोई स्थान नहीं है और स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के खिलाफ सामूहिक और सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। इसके साथ ही उन्होंने एससीओ के 'रीजनल एंटी-टेरर स्ट्रक्चर' (RATS) को और अधिक सशक्त बनाने पर बल दिया ताकि कट्टरपंथ और अलगाववाद की जड़ों पर प्रहार किया जा सके।
संबोधन के समापन सत्र में राजनाथ सिंह ने कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए कहा कि भारत केवल 'न्यू वर्ल्ड ऑर्डर' की बात नहीं करता, बल्कि एक 'अधिक व्यवस्थित और न्यायपूर्ण दुनिया' के निर्माण का पक्षधर है। उन्होंने युद्ध और हिंसा के बजाय 'संवाद और कूटनीति' (Dialogue and Diplomacy) को एकमात्र मार्ग बताया। भारत के 'वसुधैव कुटुंबकम' के चिरंतन सिद्धांत को विश्व शांति का आधार बताते हुए उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक विकास केवल आपसी सहयोग और साझा प्रतिबद्धता से ही संभव है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
