'भगवद गीता' पर रूस में विवाद ; जानिए क्या थी टॉम्सक कोर्ट की कूटनीति का मामला
2011 में टॉम्सक, रूस में ‘Bhagavad Gita As It Is’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका ने भारत–रूस कूटनीति में हलचल पैदा कर दी। स्थानीय कोर्ट ने याचिका खारिज की, और मामला वैश्विक स्तर पर भगवद गीता और धार्मिक व्याख्याओं के महत्व को उजागर करता है।

भारत–रूस कूटनीति
साइबेरिया के टॉम्सक शहर से एक अजीब लेकिन संवेदनशील मामला सामने आया, जिसने भारत और रूस के बीच कूटनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया। 2011 में, टॉम्सक के एक स्थानीय अभियोजक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध ISKCON संगठन द्वारा उपयोग किए जाने वाले ग्रंथ “Bhagavad Gita As It Is” को “अत्यधिक कट्टरपंथी साहित्य” घोषित कर, इसे अदालत में प्रतिबंधित करने की मांग की।
अभियोजक का दावा था कि इस संस्करण में धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाले कथन हैं और यह अन्य धार्मिक समूहों के प्रति शत्रुता फैला सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट था कि मामला केवल इस विशेष टिप्पणी और व्याख्या पर केंद्रित था, मूल भगवद गीता पर नहीं।
मामले ने जल्दी ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। भारत में राजनीतिक दलों, धार्मिक संगठनों और आम जनता ने इसे हिंदू धर्म की मान्यताओं पर हमला माना। संसद में भी इसका कड़ा विरोध हुआ और भारतीय विदेश मंत्रालय ने रूसी अधिकारियों से संपर्क कर “इस प्रयास की निंदनीयता” जताई।
विशेषज्ञों ने बताया कि इस संस्करण पर कार्रवाई करने का कारण इसके भावनात्मक और धार्मिक दृष्टिकोण से कुछ वाक्यों को कट्टर या आक्रामक के रूप में प्रस्तुत करना था। आलोचकों ने यह तर्क दिया कि प्रपाद्विदांत स्वामी की व्याख्या भक्तिपरक और दर्शनिक है, जिसमें किसी भी तरह की हिंसा या कट्टरता का समर्थन नहीं किया गया।
अदालत में बहस और विशेषज्ञों की राय के बाद 28 दिसंबर 2011 को टॉम्सक कोर्ट ने अभियोजन की याचिका खारिज कर दी। इस तरह ‘Bhagavad Gita As It Is’ को प्रतिबंधित नहीं किया गया और विवाद समाप्त हो गया।
इस घटना ने धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या और अंतरराष्ट्रीय कानून के बीच के संवेदनशील संतुलन को उजागर किया। साथ ही, इसने यह भी स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मामलों में न्यायिक निर्णय किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। भारत–रूस संबंधों में इस विवाद ने यह संदेश भी दिया कि सांस्कृतिक और धार्मिक संवेदनाओं का सम्मान करना कूटनीति का अहम हिस्सा है।
यह मामला ना केवल भगवद गीता के वैश्विक महत्व को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक स्थानीय कानूनी प्रयास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक ध्यान आकर्षित कर सकता है।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
