एपीएडीए (APEDA) के सुरक्षा मानकों के तहत महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और गुजरात से चुनिंदा आमों को वेपर हीट ट्रीटमेंट देने के बाद हवाई मार्ग से जापान भेजा जाता है। जानें पूरी रिपोर्ट

Indian Mango Export to Japan : वैश्विक कृषि बाजार में भारत के फलों के राजा यानी आम की धक हमेशा से रही है, और जब बात जापानी बाजार की हो, तो यह व्यापार महज एक सौदा नहीं बल्कि भारत की साख से जुड़ा मामला बन जाता है। भारत से जापान को होने वाला आम का निर्यात पूरी तरह से एक अत्यंत सुरक्षित, वैज्ञानिक और जटिल प्रक्रिया के तहत संचालित होता है। जापान के कड़े अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मानकों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने देश के चुनिंदा राज्यों में विशेष सरकारी प्रमाणित पैकहाउस और हाई-टेक ट्रीटमेंट फैसिलिटीज की एक मजबूत श्रृंखला तैयार की है। सीधे खेतों से तोड़कर किसी भी आम को सीधे जापानी सीमा में प्रवेश नहीं दिया जा सकता, बल्कि इसके लिए देश के प्रमुख राज्यों से बेहतरीन फसलों का चयन कर उन्हें कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों से गुजरना पड़ता है।

इस पूरे निर्यात नेटवर्क के भौगोलिक ताने-बाने को समझें तो इसमें मुख्य रूप से तीन भारतीय राज्य सबसे अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं। पहला और सबसे प्रमुख नाम महाराष्ट्र का आता है, जहाँ मुंबई, पुणे और देवगढ़ जैसे क्षेत्रों से विश्व प्रसिद्ध 'हापुस' यानी अल्फांसो आम को इकट्ठा किया जाता है। मुंबई के वाशी में स्थित एपीएमसी मार्केट और अन्य सरकारी प्रमाणित पैकहाउस इसके सबसे बड़े रणनीतिक केंद्र हैं। इसके बाद उत्तर भारत का रुख करें तो उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, लखनऊ और अमरोहा जैसे ऐतिहासिक बेल्ट इस मिशन में अहम भूमिका निभाते हैं, जहाँ से बेमिसाल 'दशहरी' और 'चौसा' आमों को जापानी उपभोक्ताओं के लिए तैयार किया जाता है। वहीं, गुजरात का अहमदाबाद, नवसारी और वलसाड क्षेत्र अपनी अनूठी मिठास वाले 'केसर' आम के दम पर जापानी बाजार में अपनी मजबूत पैठ बनाए रखता है।

कानूनी और आधिकारिक प्रक्रियाओं की बात करें तो भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था एपेडा और जापानी कृषि विभाग के नियमों के अनुसार हर खेप के लिए 'वेपर हीट ट्रीटमेंट' यानी वीएचटी से गुजरना अनिवार्य शर्त है। यह एक ऐसी आधुनिक तकनीक है जिसके तहत बिना किसी हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किए, आमों को एक निश्चित तापमान वाली भाप और नमी से गुजारा जाता है ताकि फल के भीतर मौजूद किसी भी प्रकार के कीड़े या उनके अदृश्य लार्वा को पूरी तरह नष्ट किया जा सके। जापान की अपनी फसलों की सुरक्षा को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति है, जिसके कारण यह वेपर हीट ट्रीटमेंट केवल और केवल भारत सरकार द्वारा विशेष रूप से प्रमाणित केंद्रों जैसे कि मुंबई या लखनऊ के अत्याधुनिक पैकहाउसों में ही संपन्न किया जा सकता है।

इस प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण और कानूनी पड़ाव तब आता है जब इस ट्रीटमेंट के पूरा होने के बाद जापानी कृषि निरीक्षकों की एक विशेष टीम खुद जमीनी स्तर पर मौजूद रहकर पूरी खेप की बारीक जांच करती है। इन विदेशी अधिकारियों के कड़े ग्रीन सिग्नल और आधिकारिक क्लीयरेंस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही आमों के इन बक्सों को मुंबई या दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर भेजा जाता है। इसके बाद एयर कार्गो के जरिए विशेष उड़ानों से इन प्रीमियम आमों को सीधे टोक्यो जैसे जापानी शहरों के लिए रवाना किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया और प्रमाणित केंद्रों की आधिकारिक और अद्यतन सूची का पूरा लेखा-जोखा एपेडा की आधिकारिक वेबसाइट पर पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया गया है।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार के इस कड़े ऊंचे मानदंडों वाले सफर से यह साफ हो जाता है कि भारतीय आमों का जापान पहुंचना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बेहद संवेदनशील मिशन है। किसी भी एक सर्टिफिकेशन सेंटर या फैसिलिटी में होने वाली छोटी सी भी तकनीकी चूक या नियमों की अनदेखी पूरे देश के निर्यात को संकट में डाल सकती है। यही वजह है कि भारत सरकार और देश के बड़े निर्यातक इन कड़े वैज्ञानिक नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करते हैं, ताकि वैश्विक बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की विश्वसनीयता और प्रीमियम गुणवत्ता का परचम हमेशा बुलंद रहे और देश के किसानों को उनकी मेहनत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ मूल्य हासिल होता रहे।

Updated On 29 May 2026 6:47 PM IST
Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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