ईरान में सत्ता परिवर्तन की आहट? खामेनेई को हटाने के संकेत, ट्रंप का बड़ा प्लान
ईरान में दो हफ्तों से जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा लोगों की मौत के बीच अमेरिकी हस्तक्षेप की आशंका गहरा गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन भरे बयानों, सैन्य ब्रीफिंग्स और इजरायल के हाई अलर्ट ने खामेनेई शासन पर बढ़ते वैश्विक दबाव के संकेत दिए हैं।

iran protest : ईरान इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे अस्थिर और संवेदनशील दौर से गुजर रहा है। देशभर में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को शुरू हुए दो हफ्ते से अधिक का समय बीत चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक इन प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है। सड़कों पर फैले जनाक्रोश के बीच अब अमेरिका के संभावित हस्तक्षेप को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसने इस संकट को वैश्विक स्तर पर और गंभीर बना दिया है।
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की ओर से आ रहे राजनीतिक और सैन्य संकेतों ने अटकलों को और हवा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ईरानी प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए शासन परिवर्तन की मांग को वैध ठहराया है। ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किए गए अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि ईरान आजादी की ओर देख रहा है और अमेरिका उसकी मदद के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान के बाद वॉशिंगटन में ईरान को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम जैसे वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने भी यह संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी हस्तक्षेप की संभावनाओं को तब और बल मिला जब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राष्ट्रपति ट्रंप को हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य विकल्पों पर ब्रीफ किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन विकल्पों में तेहरान के चुनिंदा ठिकानों पर लक्षित हमले शामिल हैं, जिनका उद्देश्य शासन की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े ढांचे को कमजोर करना हो सकता है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के नाम पर इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक अन्य रिपोर्ट ने तनाव को और बढ़ा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमलों की संभावनाओं पर विचार कर रहा है, हालांकि वॉशिंगटन में इस मुद्दे पर अभी अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। इन खबरों ने मिडिल ईस्ट में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है।
अमेरिका के संभावित हस्तक्षेप की आशंका के बीच इजरायल ने भी अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। राष्ट्रपति ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटों बाद इजरायली अधिकारियों ने संकेत दिया कि वह क्षेत्रीय हालात को देखते हुए हाई अलर्ट पर हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इजरायल की हालिया सुरक्षा बैठकों में अमेरिका की ओर से ईरान में संभावित कार्रवाई को लेकर गंभीर मंथन किया गया है।
ईरान के भीतर चल रहे आंदोलन को उस समय नया राजनीतिक आयाम मिला, जब निर्वासन में रह रहे ईरान के पूर्व क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन तेज करने की अपील की। 11 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि ईरानी जनता अकेली नहीं है और दुनिया भर में बसे ईरानी नागरिक उनके समर्थन में खड़े हैं। रजा पहलवी के इस बयान को संभावित वापसी के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन अब केवल आंतरिक असंतोष तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ चुका है। अमेरिका के बयानों, सैन्य ब्रीफिंग्स और क्षेत्रीय सहयोगियों की बढ़ती सतर्कता ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है कि क्या ईरान एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिन न सिर्फ ईरान की सत्ता संरचना, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
