‘फ्यूल कट ऑफ स्विच’ पर उठे सवाल; एयर इंडिया हादसे पर कंपनियों पे मुक़दमा दर्ज
एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश मामले में पीड़ित परिवारों ने अमेरिकी अदालत का दरवाज़ा खटखटाया है। मुकदमे में बोइंग और हनीवेल को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश मामले में पीड़ित परिवारों ने बड़ा कदम उठाया है। अहमदाबाद से लंदन उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हुई इस फ्लाइट के चार यात्रियों के परिजनों ने अमेरिकी विमान निर्माता बोइंग और तकनीकी कंपनी हनीवेल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पीड़ितों का कहना है कि यह हादसा कंपनियों की लापरवाही और खराब फ्यूल कटऑफ स्विच के कारण हुआ।
डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में दायर शिकायत :
मंगलवार को डेलावेयर सुपीरियर कोर्ट में दर्ज शिकायत में कहा गया है कि बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान पर लगे ईंधन कटऑफ स्विच का लॉकिंग मैकेनिज्म तकनीकी खामी से ग्रसित था। आरोप है कि उड़ान भरते समय स्विच अनजाने में बंद या डिसेबल हो सकता था, जिससे ईंधन की सप्लाई रुक गई और टेकऑफ के लिए जरूरी थ्रस्ट कम हो गया।
FAA की चेतावनी के बावजूद कार्रवाई नहीं :
शिकायत में कहा गया है कि बोइंग और हनीवेल इस खामी से अवगत थे। 2018 में अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने चेतावनी जारी की थी कि कई बोइंग विमानों में यह स्विच गलती से बंद होने का खतरा पैदा कर सकता है। इसके बावजूद कंपनियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। परिवारों का आरोप है कि यदि समय रहते सुधार किए जाते, तो एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश जैसी त्रासदी टाली जा सकती थी।
कंपनियों पर गंभीर आरोप :
पीड़ित परिवारों ने यह भी कहा कि स्विच को थ्रस्ट लीवर के ठीक पीछे लगाया गया था, जिससे सामान्य कॉकपिट संचालन के दौरान भी ईंधन सप्लाई रुकने की संभावना बनी रहती थी। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि बोइंग और हनीवेल दोनों ने सुरक्षा के बजाय व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी और इससे सैकड़ों लोगों की जान चली गई।
हादसे में भारी जनहानि :
12 जून को हुई इस दुर्घटना में 260 लोगों की जान गई थी, जिसमें 229 यात्री, 12 चालक दल के सदस्य और जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे। केवल एक यात्री ही हादसे से जीवित बच पाया। मुकदमे में चार मृत यात्रियों – कांताबेन धीरूभाई पघदल, नाव्या चिराग पघदल, कुबेरभाई पटेल और बेबीबेन पटेल – के परिवारों ने हर्जाने की मांग की है।
जांच अब तक अधूरी :
भारतीय, ब्रिटिश और अमेरिकी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में अब तक किसी एक कारण को निश्चित नहीं बताया गया है। भारतीय विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कॉकपिट में भ्रम की स्थिति को बड़ी वजह बताया गया, जबकि FAA ने हाल ही में कहा कि यांत्रिक खराबी या ईंधन नियंत्रण की गड़बड़ी की संभावना बेहद कम है। इसके बावजूद परिवारों का मानना है कि तकनीकी खामी ही एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश का मुख्य कारण थी।
बोइंग का पुराना विवादित इतिहास :
बोइंग पहले भी गंभीर कानूनी संकटों का सामना कर चुकी है। 2018 और 2019 में इसके 737 मैक्स विमानों के दो बड़े हादसों के बाद कंपनी को अपने विमानों की उड़ान रोकनी पड़ी थी। लगभग 20 महीनों तक चले इस प्रतिबंध से बोइंग को 20 अरब डॉलर से अधिक का वित्तीय और कानूनी नुकसान उठाना पड़ा था। अब एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश से जुड़ा मुकदमा कंपनी के लिए एक और चुनौती बन सकता है।
एयर इंडिया फ्लाइट 171 क्रैश में मारे गए यात्रियों के परिजनों का यह मुकदमा अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बोइंग और हनीवेल जैसे दिग्गज निर्माताओं पर लापरवाही के आरोप न केवल कंपनियों की साख पर असर डाल सकते हैं, बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग में सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा की मांग को भी और तेज कर सकते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
