भारत-वियतनाम मैत्री का सांस्कृतिक संगम; बिहार-महाराष्ट्र के ज़ायके के साथ प्रेसिडेंट 'तो लाम' का शाही सत्कार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वियतनामी राष्ट्रपति के सम्मान में राजकीय भोज दिया और द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के साथ 'एक्ट ईस्ट' नीति पर चर्चा की।

राष्ट्रपति भवन में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम (बाएं) और भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु (दाएं) द्विपक्षीय वार्ता के दौरान।
President Droupadi Murmu hosts President To Lam : भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों ने आज एक नया शिखर छुआ, जब भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की उनके पहले राजकीय दौरे पर राष्ट्रपति भवन में मेजबानी की। यह अवसर केवल एक कूटनीतिक मुलाकात मात्र नहीं था, बल्कि दो महान राष्ट्रों के बीच उभरती रणनीतिक साझेदारी और गहरे भावनात्मक जुड़ाव का एक अनूठा संगम था। राष्ट्रपति मुर्मु ने इस दौरान भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और इंडो-पैसिफिक विजन में वियतनाम की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊर्जा प्रदान की।
वियतनामी नेता के सम्मान में आयोजित राजकीय भोज (स्टेट बैंक्वेट) भारत की विविध सांस्कृतिक और पाक विरासत का प्रतिबिंब बन गया। राष्ट्रपति भवन की मेज पर बिहार और महाराष्ट्र के गौरवशाली स्वादों को विशेष स्थान दिया गया। मेहमानों को बिहार के नालंदा से जीआई टैग प्राप्त 'सिलाओ खाजा' और गया का प्रसिद्ध 'अनरसा' परोसा गया, जो अपनी पारंपरिक मिठास के लिए विश्वविख्यात हैं। इसके अतिरिक्त, मिथिला का प्रीमियम मखाना और हाजीपुर का प्रसिद्ध 'मालभोग केला' बिहार की कृषि संपन्नता की कहानी कह रहे थे। वहीं, महाराष्ट्र की ओर से रत्नागिरी के राजा 'अल्फांसो' आम और आधुनिक स्वास्थ्य मानकों पर खरे उतरने वाले 'मिलेट बार्स' ने भोजन के अनुभव को पारंपरिक और आधुनिकता का एक संतुलित मेल बना दिया।
कूटनीतिक शिष्टाचार के साथ-साथ उपहारों के चयन में भी भारत की आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रगति की झलक साफ दिखाई दी। राष्ट्रपति तो लाम को उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित एनबीआरआई द्वारा विकसित कमल की अनूठी प्रजाति 'नमो 108' भेंट की गई। 108 पंखुड़ियों वाला यह कमल हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में पवित्र मानी जाने वाली संख्या का प्रतीक है, जो प्राचीन विरासत और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी के बीच एक सजीव सेतु का काम करता है। उपहारों की इस सूची में मुरादाबाद के कारीगरों द्वारा निर्मित पीतल की 'बोधि वृक्ष' के साथ बुद्ध की प्रतिमा और वाराणसी का विश्वप्रसिद्ध 'बनारसी रेशमी कपड़ा' भी शामिल था। गहरे फ्यूशिया रंग का यह सिल्क कपड़ा जब वियतनाम की पारंपरिक पोशाक 'आओ दाई' का रूप लेगा, तो यह भारत-वियतनाम की साझी कलात्मक विरासत का जीवंत उदाहरण बनेगा।
यह राजकीय यात्रा रणनीतिक मोर्चे पर भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही। राष्ट्रपति मुर्मु ने जोर देकर कहा कि आसियान देशों के साथ भारत की व्यापक रणनीतिक साझेदारी में वियतनाम एक मजबूत स्तंभ है। इस आधिकारिक दौरे ने न केवल द्विपक्षीय व्यापार और सुरक्षा सहयोग की नींव को मजबूत किया है, बल्कि 'नर्म कूटनीति' (Soft Diplomacy) के माध्यम से दोनों देशों के नागरिकों के बीच के ऐतिहासिक संबंधों को भी नया विस्तार दिया है। यह आयोजन इस बात का गवाह बना कि जब दो प्राचीन सभ्यताएं साथ आती हैं, तो वे न केवल भविष्य की चुनौतियों का सामना करने का संकल्प लेती हैं, बल्कि अपनी जड़ों का सम्मान करना भी नहीं भूलतीं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
