स्लोवाकिया के नेताओं को PM Modi ने तोहफे में दी भारत की विरासत; थेवा कफलिंक समेत कई खास चीजें की भेंट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के शीर्ष नेताओं को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और प्राचीन ग्रंथ भेंट किए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपनी आधिकारिक राजकीय यात्रा के दौरान स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी को उपहार स्वरूप दिए गए पारंपरिक राजस्थानी थेवा कला के कफलिंक समाचार ग्राफिक
PM Modi Slovakia visit traditional gifts : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया विदेश दौरे के दौरान एक नया ऐतिहासिक अध्याय रचते हुए स्लोवाकिया की धरती पर कदम रखा, जिसने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता को और मजबूत कर दिया है। फ्रांस में आयोजित जी-7 (G7) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद प्रधानमंत्री दो दिवसीय यात्रा पर स्लोवाकिया पहुंचे, जहां इस देश की स्वतंत्रता के बाद दौरा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इस ऐतिहासिक आगमन पर स्लोवाकिया सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज कर भारत की बढ़ती वैश्विक साख का लोहा माना। इस बेहद गौरवपूर्ण द्विपक्षीय बैठक के दौरान पीएम मोदी ने भारत की समृद्ध बौद्धिक, वैज्ञानिक और कारीगरी विरासत का प्रतिनिधित्व करने वाले कई दुर्लभ पारंपरिक उपहार वहां के शीर्ष नेताओं को भेंट किए, जिसने इस कूटनीतिक मुलाकात को एक गहरे भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव में बदल दिया।
इस उच्च स्तरीय मुलाकात के रणनीतिक और कूटनीतिक विवरणों पर नजर डालें तो प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के नीति निर्माताओं के बौद्धिक सम्मान में भारत के प्राचीनतम वैज्ञानिक ग्रंथों को उपहार स्वरूप चुना। उन्होंने स्लोवाकिया की संसद के स्पीकर रिचर्ड रासी को भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति का गौरव कहे जाने वाले 'सुश्रुत संहिता' और 'चरक संहिता' के विशेष संस्करण भेंट किए। डॉ. सुश्रुत द्वारा रचित सुश्रुत संहिता को दुनिया में सर्जरी (शल्य चिकित्सा) का सबसे प्रारंभिक और प्रामाणिक आधार माना जाता है, जिसमें दो हजार साल पहले ही राइनोप्लास्टी जैसे एडवांस्ड रिकंस्ट्रक्टिव प्रोसीजर और जटिल सर्जिकल उपकरणों का वर्णन किया गया था। वहीं, आचार्य चरक की 'चरक संहिता' मानव शरीर क्रिया विज्ञान, प्रिवेंटिव केयर और तर्कसंगत चिकित्सा की एक विद्वत्तापूर्ण समझ पेश करती है। इन अमूल्य ग्रंथों को सौंपकर पीएम मोदी ने वैश्विक मंच पर यह संदेश दिया कि भारत सदियों पहले से ही दुनिया में वैज्ञानिक और बौद्धिक चेतना का नेतृत्व करता आया है।
सांस्कृतिक आदान-प्रदान का यह अनूठा सिलसिला यहीं नहीं थमा। प्रधानमंत्री ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी की शख्सियत को ध्यान में रखते हुए उन्हें भारत के भौगोलिक संकेतक (GI) टैग और वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) पहल से सजे हस्तशिल्प उपहार में दिए। राष्ट्रपति पेलेग्रिनी को राजस्थान के प्रतापगढ़ की सदियों पुरानी दुर्लभ थेवा तकनीक से बने हाथ से नक्काशीदार 'थेवा मोटिफ कफलिंक' और महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) की प्रसिद्ध 'हिमरू सिल्क टाई और पॉकेट स्क्वायर सेट' भेंट किए गए, जो अपनी महीन बुनाई के लिए डेक्कन दरबार के समय से विख्यात है। इसके साथ ही, उन्हें छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आदिवासी कारीगरों द्वारा 'लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग' तकनीक से तैयार पीतल का 'डोकरा एंटीलोप (हिरण) सेट' भी दिया गया। यह कलाकृति स्लोवाकिया के राष्ट्रीय प्रतीक टाट्रा चामोइस के साथ एक मजबूत प्राकृतिक और सांस्कृतिक संबंध स्थापित करती है, जो कोमलता और अटूट मजबूती का प्रतीक है।
Gift given by PM Modi to Speaker of Slovakia Richard Raši | Charak Samhita: Charaka Samhita is a foundational ancient Indian medical text and a key work of Ayurveda, attributed to Acharya Charaka. It presents a systematic and scholarly understanding of health, disease, human… pic.twitter.com/TLShzP4mZb
— ANI (@ANI) June 19, 2026
इस कूटनीतिक यात्रा के अंतिम चरण में विधिक और आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको को कश्मीर घाटी के कुशल कारीगरों द्वारा हाथ से बुना गया एक आलीशान कश्मीरी सिल्क कारपेट भेंट किया। उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक रेशम और बेल-बूटेदार डिजाइनों से सजे इस कालीन को तैयार करने में भारतीय शिल्पकारों को महीनों का कड़ा श्रम करना पड़ता है, जो अब स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री आवास की शोभा बढ़ाएगा। वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की गई यह ऐतिहासिक स्लोवाकिया यात्रा और वहां मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान ने न केवल मध्य यूरोप में भारत के कूटनीतिक और आर्थिक हितों को सुरक्षित किया है, बल्कि देश की पुरातन कला, विज्ञान और जीआई टैग उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक अभूतपूर्व पहचान और कूटनीतिक मजबूती भी प्रदान की है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
