खामेनेई का अंतिम संस्कार बना वैश्विक शक्ति राजनीति का केंद्र ; ईरानी राष्ट्रपति से पीएम मोदी को मिला आमंत्रण
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। 4 से 9 जुलाई तक चलने वाले इस बहु-शहरीय आयोजन में लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। भारत का निर्णय कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैय्यद अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार और दफन समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। यह आमंत्रण 24 जून 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार भेजा गया है, जिसे पश्चिम एशिया की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
ईरान में खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर है और अब सरकार ने उनके सम्मान में बहु-शहरों में विस्तृत राजकीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम की घोषणा की है। पहले इन कार्यक्रमों को क्षेत्रीय संघर्ष के कारण स्थगित किया गया था, लेकिन अब इन्हें जुलाई में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार 4 जुलाई 2026 को तेहरान स्थित ग्रैंड मोसल्ला परिसर में औपचारिक अंतिम संस्कार की शुरुआत होगी, जहां दिवंगत नेता का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। यह आयोजन राज्य स्तर पर प्रमुख समारोह के रूप में संपन्न होगा।
इसके बाद 4 से 6 जुलाई तक तेहरान में सार्वजनिक शोक सभाएं और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे, जिनमें लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। 7 जुलाई को ईरान के प्रमुख धार्मिक केंद्र क़ोम में विशेष धार्मिक समारोहों का आयोजन किया जाएगा, जो देश के शिया धार्मिक नेतृत्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अतिरिक्त इराक के पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में भी विशेष प्रार्थनाओं और धार्मिक आयोजनों की योजना है, जिनमें प्रमुख शिया धर्मगुरुओं की भागीदारी अपेक्षित है। अंतिम दफन समारोह 9 जुलाई 2026 को मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह में किया जाएगा, जिसे खामेनेई का पैतृक और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है।
यह पूरा अंतिम संस्कार कार्यक्रम ईरान के आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े राजकीय आयोजनों में से एक माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार खामेनेई की मृत्यु फरवरी 2026 में अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए हवाई हमलों के दौरान हुई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद ईरान में लंबा राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया और सत्ता परिवर्तन से जुड़े प्रशासनिक कदम भी शुरू किए गए, जिससे यह आयोजन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
ईरान ने इस अवसर पर भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, इराक, अफगानिस्तान, सीरिया, लेबनान और मध्य एशियाई देशों सहित कई देशों के प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित किया है। अनुमान है कि इस अंतिम संस्कार में दुनिया भर से लाखों शोकाकुल लोग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।
भारत की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस समारोह में शामिल होंगे या नहीं। निर्णय कूटनीतिक परिस्थितियों और सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर लिया जाएगा। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से संबंध बने रहे हैं, और दोनों देशों के बीच रणनीतिक एवं क्षेत्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे पहले भी भारत ने ईरान के साथ संवेदनशील परिस्थितियों में उच्च स्तरीय कूटनीतिक संपर्क बनाए रखा है।
खामेनेई के निधन के बाद भारत सरकार की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में जाकर शोक पुस्तिका में संवेदना व्यक्त की थी। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान ईरानी नेतृत्व के साथ कई दौर की बातचीत की थी। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत का दौरा किया था, जहां उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की और प्रधानमंत्री मोदी से भी चर्चा की थी। इसके अलावा वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों की भी भारत में हालिया कई यात्राएं हुई हैं, जो द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को दर्शाती हैं।
यदि प्रधानमंत्री मोदी इस अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं, तो इसे ईरान के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों की निरंतरता और पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति के संकेत के रूप में देखा जाएगा। इससे भारत के इज़राइल, खाड़ी देशों और ईरान के बीच कूटनीतिक संतुलन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। वहीं यदि प्रधानमंत्री शामिल नहीं होते हैं, तो भारत की ओर से किसी वरिष्ठ मंत्री या विशेष प्रतिनिधि को भेजे जाने की संभावना बनी रहेगी।
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक राजकीय अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और पश्चिम एशिया की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के बीच एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी निगाहें अब भारत के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
