आखिर क्यों खास है मोदी का मेलोनी को दिया यह 'शिरुई लिली' सिल्क स्टोल? जानें विस्तार से
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की अपनी रणनीतिक यात्रा के दौरान वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को असम का मूगा सिल्क और मणिपुर का शिरुई लिली स्टोल भेंट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए भेंट किया गया मणिपुर का पारंपरिक 'शिरुई लिली सिल्क स्टोल'।
PM Modi five nation tour 2026 : संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की अपनी बेहद सफल और रणनीतिक पांच देशों की आधिकारिक यात्रा संपन्न कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार सुबह स्वदेश लौट आए हैं। अपनी इस व्यापक राजनयिक यात्रा के आखिरी पड़ाव में भारत और इटली के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए ऐतिहासिक धरातल पर ले जाते हुए दोनों देशों ने 'विशेष रणनीतिक साझेदारी' (Special Strategic Partnership) का एक नया अध्याय शुरू किया है। इस दौरान जहां कई महत्वपूर्ण वैश्विक, आर्थिक और रक्षा समझौतों पर मुहर लगी, वहीं द्विपक्षीय वार्ताओं के बीच पीएम मोदी ने अपनी चिरपरिचित 'सांस्कृतिक कूटनीति' (Cultural Diplomacy) के जरिए वैश्विक पटल पर भारत की प्राचीन और समृद्ध विरासत की अमूल्य छाप छोड़ी। पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तथा ऐतिहासिक शहरों की नायाब और दुर्लभ हस्तशिल्प कलाकृतियां भेंट कीं, जो दोनों देशों के बीच प्राचीन कलात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव को और प्रगाढ़ बनाने का एक मजबूत माध्यम बनकर उभरी हैं।
पीएम मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के असम का विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक 'मूगा सिल्क स्टोल' और मणिपुर की सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक 'शिरुई लिली सिल्क स्टोल' भेंट किया। असम के 'गोल्डन सिल्क' के नाम से दुनिया भर में विख्यात मूगा सिल्क पूर्वोत्तर भारत की ब्रह्मपुत्र घाटी का एक अत्यंत दुर्लभ, बहुमूल्य और प्रतिष्ठित वस्त्र है। अपनी प्राकृतिक सुनहरी चमक और शाही सादगी के लिए पहचाने जाने वाले इस बेहतरीन रेशम को बिना किसी कृत्रिम रंग या रसायनों के तैयार किया जाता है। दुनिया के सबसे मजबूत प्राकृतिक रेशों में से एक होने के कारण यह कपड़ा सदियों और पीढ़ियों तक पूरी तरह सुरक्षित रहता है तथा समय बीतने के साथ-साथ इसकी प्राकृतिक आभा और भी अधिक निखरती जाती है। नमी सोखने की अद्भुत क्षमता और यूवी-प्रतिरोधी (UV-resistant) गुणों से समृद्ध यह सिल्क बेहद आरामदायक माना जाता है, जो इटली की अपनी शानदार वस्त्र परंपरा और सदाबहार डिज़ाइनों के साथ एक स्वाभाविक व वैश्विक तालमेल बिठाता है।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मेलोनी को भेंट किया गया 'शिरुई लिली सिल्क स्टोल' मणिपुर के उखरुल जिले में स्थित शिरुई काशोंग पर्वत की धुंध भरी खूबसूरत पहाड़ियों और वहां की समृद्ध लोककथाओं से पूरी तरह प्रेरित है। 'शिरुई लिली' वास्तव में एक अत्यंत दुर्लभ और घंटी के आकार का ऐसा जादुई फूल है जिसकी पंखुड़ियां हल्के गुलाबी-सफेद रंग की होती हैं और यह पूरी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ इसी पहाड़ी की चोटी पर प्राकृतिक रूप से खिलता है। मणिपुर के स्वदेशी 'तंगखुल नगा' समुदाय के लिए यह दुर्लभ पुष्प पवित्रता, विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक गौरव का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। यह स्टोल न केवल हिमालयी कारीगरी की अद्वितीय सुंदरता को समेटे हुए है, बल्कि इसमें वहां की जनजातीय परंपराओं की आत्मा भी रची-बसी है। दिलचस्प और ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि इटली की अपनी संस्कृति में भी लिली के फूल का एक अत्यंत गहरा और पवित्र महत्व रहा है, जहां इसे पुनर्जागरण काल (Renaissance Period) की महान कलाकृतियों और वास्तुकला में पवित्रता, सौम्यता तथा कलात्मक परिष्कार के प्रतीक के रूप में दर्शाया जाता रहा है। इसी साझी प्रतीकात्मकता और सांस्कृतिक दर्शन में भारत और इटली के बीच का एक अनूठा और अदृश्य जुड़ाव छिपा हुआ है।
राजनयिक शिष्टाचार के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली के राष्ट्रपति सर्जियो मैटारेला को उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा के माहिर दस्तकारों द्वारा निर्मित प्रसिद्ध पच्चीकारी कला का एक नायाब नमूना, 'मार्बल इनले वर्क बॉक्स' (संगमरमर की जड़ाई वाला बक्सा) भेंट किया। उत्कृष्ट हस्तशिल्प कला के इस उत्कृष्ट सफेद संगमरमर के बक्से पर लैपिस लाजुली, फ़िरोज़ा, मैलाकाइट, मूंगा और सीप जैसे बहुमूल्य पत्थरों को बेहद बारीक नक्काशी के साथ तराशकर जड़ा गया है। कला के इतिहास के नजरिए से यह उपहार दोनों देशों के बीच एक जीवंत कलात्मक सेतु की तरह है, क्योंकि 'पच्चीकारी' या 'पिएत्रा ड्यूरा' (Pietra Dura) कला की वास्तविक उत्पत्ति मूल रूप से इटली के फ्लोरेंस शहर से मानी जाती है, जो सदियों पहले भारत में मुगलिया और शाही संरक्षण के तहत फल-फूलकर भारतीय हस्तशिल्प की पहचान बन गई। इस ऐतिहासिक बॉक्स के भीतर भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो महानतम विभूतियों और 'भारत रत्न' से सम्मानित पंडित भीमसेन जोशी (हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत) तथा एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी (कर्नाटक संगीत) की कालजयी संगीत रचनाओं की विशेष सीडी भी संजोकर रखी गई थीं, जिन्होंने अपनी दिव्य आवाज से वैश्विक स्तर पर भारत को एक विशिष्ट पहचान दिलाई।
वैधानिक और आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत, राष्ट्रप्रमुखों के बीच होने वाले ऐसे उच्चस्तरीय दौरों और उपहारों के आदान-प्रदान को विदेश मंत्रालय (MEA) की आधिकारिक संदर्शिका और राजनयिक नियमों के तहत प्रलेखित किया जाता है। भारत और इटली के बीच बढ़ते रणनीतिक सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझी सुरक्षा नीतियों और वर्ष 2029 तक आपसी द्विपक्षीय व्यापार को 20 बिलियन यूरो तक ले जाने के बड़े आर्थिक लक्ष्यों के बीच इन सांस्कृतिक उपहारों का वैश्विक प्रभाव बेहद दूरगामी होने वाला है। पीएम मोदी की यह पांच देशों की सफल यात्रा और उसमें प्रदर्शित भारत की यह सांस्कृतिक कूटनीति स्पष्ट करती है कि आज के आधुनिक दौर में अंतरराष्ट्रीय संबंध केवल भौगोलिक और सैन्य सीमाओं तक ही सीमित नहीं हैं; बल्कि दो महान सभ्यताओं के बीच कला, हस्तशिल्प, परंपरा और आपसी साझा मूल्यों का यह जीवंत संवाद ही अंततः वैश्विक शांति और दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों की सबसे मजबूत और अटूट नींव तैयार करता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
