ईरान युद्ध के वैश्विक उथल-पुथल के बीच होगा महामंथन ; जानें कब और कहाँ मिलेंगे मोदी-ट्रंप
ईरान युद्ध और तेल संकट के बीच जून में फ्रांस के G-7 समिट में मिलेंगे पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप। 16 महीने बाद होने वाली इस महामुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर।

फरवरी 2025 में वॉशिंगटन दौरे के दौरान चर्चा करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (बाएं) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (दाएं)। दोनों नेता अब जून 2026 में फ्रांस में मुलाकात करेंगे।
G7 Summit France : मिडिल ईस्ट में भड़कती युद्ध की चिंगारी और दुनिया पर मंडराते गंभीर तेल संकट के बीच एक बेहद बड़ी कूटनीतिक खबर सामने आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जल्द ही एक बेहद अहम और संवेदनशील मुलाकात होने जा रही है। वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में दोनों महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं की यह पहली रणनीतिक मुलाकात होगी। यह महामंथन अगले महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन के इतर (सैमने) पेरिस में होने की पूरी संभावना है, जहां दोनों देशों के राष्ट्रप्रमुख इस वैश्विक मंच का हिस्सा बनने पहुंच रहे हैं।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट 'एक्सियोस' (Axios) की एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह बहुप्रतीक्षित मुलाकात जून महीने के मध्य में हो सकती है। फ्रांस की मेजबानी में 15 से 17 जून के बीच एवियन (Evian) में G-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन होना तय हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस पहुंच रहे हैं, वहीं फ्रांस सरकार ने भी आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि कर दी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए अपनी क्रेडेंशियल्स और भागीदारी को हरी झंडी दे दी है। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में यह पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि इसी दौरान दोनों देशों के प्रमुख द्विपक्षीय वार्ता के लिए मेज पर आमने-सामने होंगे।
यह मुलाकात भारतीय विदेश नीति और वैश्विक समीकरणों के लिहाज से इसलिए भी बेहद खास है, क्योंकि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आखिरी बैठक फरवरी 2025 में वॉशिंगटन में हुई थी। उसके बाद से बीते 16 महीनों में दोनों नेताओं के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं हुई है। गौरतलब है कि पीएम मोदी के पिछले अमेरिकी दौरे के बाद भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त रुख अपनाया था और जुर्माने के तौर पर भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए थे, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में कुछ समय के लिए तल्खी और दूरी देखी गई थी। हालांकि, हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए एक बड़े ट्रेड डील (व्यापार समझौते) ने इस तनाव को कम किया है, जिससे इस आगामी बैठक का रास्ता साफ हुआ है।
आधिकारिक और कूटनीतिक स्तर पर इस दौरे की रूपरेखा पहले ही तैयार की जा चुकी है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और फ्रांस के यूरोप एवं विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल के बीच G-7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई थी। इस बातचीत में फ्रांस ने स्पष्ट किया कि भारत भले ही G-7 समूह का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के नाते उसे एक विशेष भागीदार देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। दोनों देशों के मंत्रियों ने वैश्विक मंच पर भारत की महत्वपूर्ण भूमिका और उसके योगदान की सराहना की है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक के एजेंडे में कई बेहद संवेदनशील और अंतरराष्ट्रीय मुद्दे शीर्ष पर रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि मौजूदा समय में होर्मुज जलडमरूमन्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी के कारण दुनिया भर में जो तेल संकट गहराया है और जिसके चलते ईंधन की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और वैश्विक महंगाई का खतरा पैदा हो गया है, उस पर दोनों नेता गहन मंथन करेंगे। इसके अलावा, ईरान-इजरायल युद्ध के चलते पैदा हुए भू-राजनीतिक संकट को थामने के लिए भारत और अमेरिका मिलकर क्या कदम उठा सकते हैं, इस पर भी रणनीतिक साझेदारी की नई इबारत लिखी जा सकती है। वैश्विक राजनीति के इस सबसे बड़े घटनाक्रम पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
