इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी ने भारत को विकासवादी बताया और विस्तारवाद को सिरे से खारिज किया। सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलने पर उन्होंने क्या कहा और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य पर प्रधानमंत्री की राय जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत को एक ऐसा देश बताया जो विस्तारवाद में नहीं, बल्कि विकास में विश्वास रखता है। उन्होंने भारत-इंडोनेशिया साझेदारी को साझा विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों और एक सामान्य सभ्यतागत विरासत से परिभाषित होने वाली साझेदारी के रूप में पेश किया। कानून निर्माताओं के समक्ष अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया अपने द्विपक्षीय संबंधों के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं और आने वाली अगली एक चौथाई सदी दोनों देशों के भविष्य के लिए निर्णायक भूमिका निभाएगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सदी का पहला चौथाई हिस्सा पहले ही बीत चुका है और अगले 25 वर्ष दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि आज वे इंडोनेशिया की महान धरती पर दोनों राष्ट्रों के साझा विकास और प्रगति के प्रति आत्मविश्वास लेकर आए हैं। प्रधानमंत्री ने इससे पहले दिन में उन्हें इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किए जाने का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने यह सम्मान 1.4 अरब भारतीयों की ओर से स्वीकार किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वे इंडोनेशिया के लोगों द्वारा दिखाए गए इस स्नेह को लाखों भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक और पूरे दिल से स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों, साझा विरासत और दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों के लिए एक श्रद्धांजलि है। अपने संबोधन की शुरुआत में पीएम मोदी ने जकार्ता में मिले गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए इंडोनेशियाई नेतृत्व और वहां के लोगों का धन्यवाद किया और इसे अपने जीवन के सबसे यादगार दिनों में से एक बताया।

Pratahkal Newsroom

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