विमान या टाइम बम? खुद-ब-खुद बंद हो रहे हैं विमान के इंजन? एयर इंडिया को ग्राउंड करने पड़े सारे जहाज...
एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान में फ्यूल स्विच की खराबी ने 2025 की AI171 विमान त्रासदी की यादें ताजा कर दी हैं। लंदन-बेंगलुरु उड़ान के दौरान हुई इस घटना के बाद पूरे बेड़े की जांच शुरू हो गई है। क्या यह बोइंग की डिजाइन संबंधी खामी है या मानवीय चूक? जानिए इस गंभीर सुरक्षा संकट और विमानन विशेषज्ञों के दावों की पूरी सच्चाई इस विस्तृत रिपोर्ट में।

विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है, क्योंकि एयर इंडिया के एक बोइंग 787 ड्रीमलाइनर में आई तकनीकी खराबी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है। 2 फरवरी, 2026 को लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरने की तैयारी कर रहे विमान AI132 के स्टार्टअप के दौरान एक अप्रत्याशित घटना घटी। तकनीकी जांच में सामने आया कि विमान का बायां 'फ्यूल कंट्रोल स्विच' इंजन शुरू होते समय अपने आप अपनी स्थिति से हिल गया। हालांकि यह विमान सुरक्षित रूप से बेंगलुरु में लैंड कर गया, लेकिन इस छोटी सी लगने वाली घटना ने एयर इंडिया प्रबंधन को इतना चौकन्ना कर दिया कि उन्होंने न केवल उस विमान को ग्राउंडेड कर दिया, बल्कि अपने पूरे बोइंग 787 बेड़े की सघन जांच के आदेश दे दिए हैं।
यह मामला महज एक तकनीकी खराबी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने जून 2025 में हुए उस भयावह AI171 विमान हादसे के जख्मों को हरा कर दिया है जिसमें 260 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गई थीं। उस समय हुई दुर्घटना की प्रारंभिक रिपोर्टों में यह पाया गया था कि टेकऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच अचानक बंद हो गए थे, जिससे इंजन पूरी तरह ठप हो गए। वर्तमान में हुई इस ताजा घटना ने विशेषज्ञों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या बोइंग 787 के स्विच डिजाइन में कोई ऐसी खामी है जो कंपन या अन्य बाहरी दबाव के कारण स्वतः सक्रिय हो जाती है।
इस मुद्दे पर अब विमानन जगत दो स्पष्ट धड़ों में बंट गया है। भारतीय पायलट और मीडिया जगत इसे विमान की संरचनात्मक विफलता के रूप में देख रहे हैं, जिसका आधार साल 2018 में अमेरिकी विमानन नियामक (FAA) द्वारा जारी की गई वह एडवाइजरी है जिसमें इन स्विचों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए गए थे। वहीं दूसरी ओर, विदेशी विशेषज्ञ और बोइंग कंपनी इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं। उनका तर्क है कि इन स्विचों को बंद करने के लिए एक विशेष और जानबूझकर लगाए गए बल की आवश्यकता होती है, इसलिए वे मानवीय चूक या 'पायलट एरर' की संभावना को अधिक प्रबल मान रहे हैं।
वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एयर इंडिया ने बोइंग और वैश्विक नियामकों के साथ विचार-विमर्श तेज कर दिया है। अब तक किए गए बेड़े के आधे निरीक्षणों में कोई बड़ा दोष नहीं मिला है, लेकिन जांच अभी भी जारी है। यदि भविष्य में यह साबित होता है कि यह वास्तव में एक डिजाइन संबंधी त्रुटि है, तो यह वैश्विक स्तर पर बोइंग 787 ड्रीमलाइनर की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें जांच के अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगी कि क्या आसमान का यह सफर वाकई सुरक्षित है या किसी बड़ी अनहोनी की आहट दे रहा है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
