‘गाजा का स्वास्थ्य तंत्र टूटने की कगार पर’ ; फिलिस्तीन ने मोदी सरकार से मांगे 100 मिलियन डॉलर
फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत से गाजा और वेस्ट बैंक के लिए 100 मिलियन डॉलर की चिकित्सा सहायता की मांग की है। दूतावास ने गाजा के स्वास्थ्य तंत्र के लगभग ध्वस्त होने, अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की भारी कमी, हजारों कैंसर मरीजों पर मंडराते खतरे और ‘आरोग्य मैत्री’ पहल का हवाला देते हुए तत्काल मदद की अपील की है।

फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत से मांगी चिकित्सा सहायता
गाजा में जारी युद्ध और मानवीय संकट के बीच भारत से बड़ी आर्थिक एवं चिकित्सीय सहायता की मांग की गई है। नई दिल्ली स्थित फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत सरकार से 100 मिलियन डॉलर (करीब 850 करोड़ रुपये) मूल्य की जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है। दूतावास का कहना है कि गाजा का स्वास्थ्य तंत्र अब अपने इतिहास के सबसे गंभीर दौर से गुजर रहा है और लाखों लोगों का जीवन तत्काल सहायता पर निर्भर है।
शुक्रवार को जारी दो पन्नों की अपील में फिलिस्तीनी दूतावास ने भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गाजा और वेस्ट बैंक में बिगड़ती स्वास्थ्य व्यवस्था को बचाने के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। दूतावास ने कहा कि गाजा में चल रहे संघर्ष के 986वें दिन तक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति अभूतपूर्व स्तर तक तबाह हो चुकी है।
दूतावास ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि गाजा में मौजूद 36 अस्पतालों में से केवल 19 अस्पताल ही आंशिक रूप से कार्य कर रहे हैं और वे भी अत्यंत सीमित आपातकालीन परिस्थितियों में सेवाएं दे पा रहे हैं। WHO ने चेतावनी दी है कि गाजा की स्वास्थ्य व्यवस्था अब "ब्रेकिंग पॉइंट" यानी टूटने की कगार पर पहुंच चुकी है।
Palestinian Embassy in India appeals to New Delhi for urgent medical supplies and support. pic.twitter.com/cJFlObsZXK
— Sidhant Sibal (@sidhant) June 19, 2026
अपील में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने एनेस्थीसिया, एंटीबायोटिक्स, डायलिसिस सामग्री, रक्त इकाइयों, सर्जिकल उपकरणों, इंसुलिन और अस्पतालों के जनरेटर चलाने के लिए आवश्यक ईंधन की गंभीर कमी की पुष्टि की है। लगातार जारी सैन्य कार्रवाई के कारण हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में घायल होने के चलते शेष अस्पतालों पर असाधारण दबाव बना हुआ है। इसके साथ ही हजारों मरीज अब भी तत्काल चिकित्सा निकासी और विदेशों में इलाज की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
फिलिस्तीनी दूतावास ने संयुक्त राष्ट्र, WHO और UNRWA सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि गाजा में लाखों इमारतों के नष्ट होने, मलबे के नीचे 12,000 से अधिक शवों के फंसे होने, कब्रिस्तानों के व्यापक विनाश, विस्थापितों के भीड़भाड़ वाले शिविरों, स्वच्छता व्यवस्था के ध्वस्त होने, साफ पानी की कमी और कचरे के बढ़ते ढेर ने एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा को जन्म दिया है। दूतावास के अनुसार इन परिस्थितियों के कारण चूहों, सांपों और मच्छरों की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि त्वचा रोगों, जूं, पिस्सू, खटमलों और अन्य संक्रमणों का तेजी से प्रसार हो रहा है, जिससे महामारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
वेस्ट बैंक की स्थिति का उल्लेख करते हुए दूतावास ने बताया कि पिछले वर्ष फिलिस्तीनी सरकारी अस्पतालों में लगभग 65,000 सर्जरी की गई थीं, लेकिन वर्ष 2026 में अब तक केवल 19,500 सर्जरी ही हो सकी हैं। दवाओं, चिकित्सा सामग्री और संचालन क्षमता की कमी के कारण 11,000 से अधिक निर्धारित सर्जरियां स्थगित करनी पड़ी हैं।
अपील में यह भी कहा गया कि फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय लगभग 520 आवश्यक दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इनमें से करीब 180 दवाएं पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। कैंसर और ट्यूमर के उपचार में उपयोग होने वाली 97 विशेष दवाओं में से 50 का स्टॉक शून्य स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे लगभग 4,000 कैंसर मरीजों का जीवन तत्काल खतरे में पड़ गया है। इसके अलावा केंद्रीय चिकित्सा भंडारों में डायलिसिस फिल्टर, हृदय शल्य चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाले विशेष सर्जिकल स्यूचर और अन्य कई जीवनरक्षक चिकित्सा सामग्रियों की भारी कमी बताई गई है। दूतावास के अनुसार इन आवश्यक संसाधनों की अनुपलब्धता अनेक मरीजों के लिए धीरे-धीरे मृत्यु का कारण बन सकती है।
भारत से सहायता की अपील करते हुए फिलिस्तीनी दूतावास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘आरोग्य मैत्री’ पहल का विशेष उल्लेख किया। दूतावास ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए कहा था कि भारत प्राकृतिक आपदाओं या मानवीय संकटों से प्रभावित किसी भी विकासशील देश को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराएगा। फिलिस्तीनी पक्ष ने इसी प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए भारत से 100 मिलियन डॉलर मूल्य की दवाओं और चिकित्सा सामग्री की सहायता मांगी है।
यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने घोषणा की थी कि भारत UNRWA को अपने वार्षिक 5 मिलियन डॉलर के योगदान की पहली किस्त के रूप में 2.5 मिलियन डॉलर जारी करेगा। ऐसे में फिलिस्तीनी दूतावास द्वारा मांगी गई 100 मिलियन डॉलर की सहायता भारत की हालिया घोषित सहायता राशि से लगभग 20 गुना अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत इस स्तर की सहायता प्रदान करता है तो यह हाल के वर्षों में फिलिस्तीन के लिए भारत की सबसे बड़ी मानवीय सहायता पहलों में से एक हो सकती है। हालांकि फिलहाल भारत सरकार की ओर से इस अनुरोध को स्वीकार करने या 100 मिलियन डॉलर की सहायता देने संबंधी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। गाजा और वेस्ट बैंक में लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य एवं मानवीय परिस्थितियों के बीच फिलिस्तीनी दूतावास की यह अपील अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बार फिर उस संकट की गंभीरता को रेखांकित करती है, जहां चिकित्सा संसाधनों की कमी लाखों लोगों के जीवन और भविष्य पर सीधा प्रभाव डाल रही है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
