अंतरराष्ट्रीय राजनीती में बहोत से नये बदलाव होते हुए हमे दिखाई दे राहे है . हर कोई देश अपनी अपनी राजनीतीयों को अपने अपने तरीकेसे पूरी करने की कोशिश में जुटे रह रहे है. ऐसे में अब पाकिस्तान भी अपनी चाल चलाने के कोशिश में है . इसी के चलते पाकिस्तान और सऊदी अरब इन दोनों के बिच में एक नया डिफेंस समझौता तय हुआ है. इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अनेक चर्चाये चल रही है . उसमे से सबसे अहम बात ये है की , पाकिस्तान अपनी न्यूक्लिअर टेक्नोलोजी सऊदी अरब को देनेवाला है. इस को लेकर पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक बड़ा बयान किया है. उन्होंने कहा की "हमारे पास जो भी है, हम उन्हें देंगे." उनका यही बयान सुर्खियों में है. तो आइये जानते है क्या है ये पूरा मामला .


ख्वाजा आसिफ के इस बयान से इस पूरी दिल की अहमियत क्या है यह पता चलती है. पकिस्तानी न्यूज चैनल को इंटरविव देते वक्त ख्वाजा आसिफ ने कहा की , "सऊदी अरब और पाकिस्तान के नए डिफेंस समझौते के अनुसार पाकिस्तान की परमाणु शक्ति सऊदी को उपलब्ध होगी. आगे उन्होंने कहा की इस समझौको मध्यस्त रखते हुए बाकि अरब देशभी शामिल हो सकते है.



इस समझौते के वजह से सऊदी अरब में एक नयी उम्मीद की किरण जगी है. उन्हें पहले से ही पता था की पाकिस्तान की परमाणु क्षमताएं उनके लिए सुरक्षा कवच से कुछ काम नहीं है . इससे उनको सुरक्षा प्रदान होगी. अब पाकिस्तान के इस चल के बाद अरब देशोंके रणनीति में कुछ बदलाव जरूर आएंगे . इस समझौतैसे अरब की प्राथमिकता और साझेदारी को नया मोड़ मिल सकता है. हालाकी, एक रिपोर्ट में मुताबिक पाकिस्तान के पास भारत के मुकाबले परमाणु हतियार काम है. पाक के पास लगभग १७० परमाणु हतियार है और भारत के पास कुछ १७३ परमाणु हतियार है .


सप्ताहिक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते वक्त विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत खान ने कहा की , "यह डील किसी तिसरे देश के खिलाफ नाही है. यह समझौता सिर्फ परस्पर रक्षा समझौता है . यह सिर्फ रक्षा सहयोग बढ़ाने और संरक्षा सुरक्षा सुनिश्चिति के वास्ते दोनों देश प्रतिबद्ध रहेंगे . यह इस समझौतेका मुख्य उद्दिष्ट है. इस समझौते को क्षेत्र और दुनिया में शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक मील का पत्थर बताया. इस सम्पूर्ण घटना क्रम में भारत ने भी अपना रिएक्शन दिया है .


पाक-सऊदी अरब डिफेंस समझौते पर भारत ने क्या कहा ?


पाकिस्तान और सऊदी अरब ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक अहम रणनीतिक परस्पर रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत दोनों देशों पर किसी भी हमले को साझा आक्रमण माना जाएगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में कतर में हमास नेतृत्व पर इज़राइल का हमला खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर चुका है। समझौते के बाद क्षेत्रीय राजनीति में हलचल मच गई है और भारत ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गुरुवार (18 सितंबर 2025) को कहा कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता पर इस कदम के प्रभावों का बारीकी से अध्ययन करेगा।


Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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