ईरान-अमेरिका के बीच पिसा पाकिस्तान; जानें अफगानिस्तान को क्यों बनाया जा रहा है 'सॉफ्ट टारगेट'?
मध्यस्थता विफल होने के बाद पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कुनार में हवाई हमले किए, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य तनाव चरम पर पहुंच गया है।

वैश्विक कूटनीतिक संकट के बीच ईरान, पाकिस्तान और अमेरिका के शीर्ष नेताओं (बाएं से दाएं) का एक कोलाज
Pakistan airstrikes on Afghanistan April 2026 : वैश्विक कूटनीति के रंगमंच पर शांतिदूत का मुखौटा पहनकर उतरे पाकिस्तान की असलियत एक बार फिर दुनिया के सामने बेनकाब हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की विफल कोशिशों के बाद अब इस्लामाबाद ने अफगानिस्तान पर भीषण हवाई हमले कर दक्षिण एशिया में युद्ध के नए बादल मंडरा दिए हैं। सोमवार को पाकिस्तानी वायुसेना ने अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों और शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाया, जिसे रक्षा विशेषज्ञ शांति वार्ता के विफल होने के बाद पाकिस्तान की 'एग्जिट स्ट्रैटेजी' के तौर पर देख रहे हैं। यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान को सीधे तौर पर बमबारी की चेतावनी दी है और ईरान ने भी पलटवार करते हुए चार गुना अधिक विनाशक जवाबी कार्रवाई का संकल्प दोहराया है।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली दूसरे दौर की बातचीत से पहले तेहरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को सिरे से खारिज कर दिया। इससे न केवल पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय साख को धक्का लगा, बल्कि उसे अरबों रुपये का आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। इस कूटनीतिक शिकस्त से ध्यान भटकाने और अपनी सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के लिए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल और कुनार प्रांत को निशाना बनाया। सोमवार को हुए इन हमलों में कुनार स्थित सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी और आम नागरिकों के घर तबाह हो गए, जिसमें 10 बेगुनाह लोगों की जान चली गई और 80 से अधिक गंभीर रूप से घायल हो गए। पाकिस्तान इस उकसावे वाली कार्रवाई के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का पुराना आरोप लगा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक इसे पाकिस्तान की अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं को छिपाने की कोशिश मान रहे हैं।
इस पूरे विवाद के पीछे एक गहरा रणनीतिक पेंच सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता भी है। पाकिस्तान और रियाद के बीच नाटो की तर्ज पर एक गुप्त समझौता है, जिसके तहत सऊदी अरब पर हुआ कोई भी हमला पाकिस्तान पर हमला माना जाएगा। हाल ही में पाकिस्तान ने 13 हजार सैनिकों और फाइटर जेट्स की एक बड़ी टुकड़ी सऊदी अरब भेजी है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है और सऊदी अरब इसमें शामिल होता है, तो पाकिस्तान को न चाहते हुए भी ईरान के खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ेगा। हालांकि, पाकिस्तान के भीतर मौजूद 20 प्रतिशत शिया आबादी के आक्रोश और ईरान के साथ सीमा साझा करने के कारण वह सीधे टकराव से बच रहा है। इसी कशमकश के बीच उसने अफगानिस्तान को एक 'सॉफ्ट टारगेट' के रूप में चुना है ताकि वह अमेरिका को अपनी उपयोगिता दिखा सके और ईरान के साथ सीधे युद्ध के खतरे को टाल सके।
अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तानी हमलों के बाद कड़ी जवाबी कार्रवाई की है और अब दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की घोषणा जैसी स्थिति पैदा हो गई है। 27 फरवरी और फिर अप्रैल के इन हमलों ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान अपनी सीमाओं पर अस्थिरता पैदा कर अंतरराष्ट्रीय दबाव से निकलने का रास्ता खोज रहा है। डूरंड लाइन पर बढ़ता यह तनाव केवल दो पड़ोसी देशों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसने पूरे खाड़ी क्षेत्र और दक्षिण एशिया को एक ऐसे ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है जो कभी भी फट सकता है। पाकिस्तान का यह जुआ उसे वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर सकता है या फिर एक और भीषण क्षेत्रीय युद्ध का सूत्रधार बना सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
