तेल कंपनियों का 107 अरब का भुगतान अटकाया ; क्या अब पाक में ठप हो सकता है ईंधन सप्लाई ?
पाकिस्तान में तेल कंपनियों का 107 अरब रुपये का भुगतान अटका, नकदी संकट के कारण देश में ईंधन सप्लाई ठप होने की चेतावनी। जानें क्या है पूरा मामला और सरकार का रुख।

तेल रिफाइनरी के पाइप और मशीनरी के साथ पाकिस्तान का मानचित्र और झंडा।
Pakistan oil marketing companies liquidity crisis : अमेरिका और ईरान के बीच एक महीने से अधिक समय तक चले सैन्य संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को पहले ही झकझोर दिया था, लेकिन अब इसका सबसे विनाशकारी प्रभाव पड़ोसी देश पाकिस्तान में दिखने लगा है। पाकिस्तान की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर नकदी संकट से जूझ रही हैं, जिससे पूरे देश में ईंधन की किल्लत का खतरा पैदा हो गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शहबाज सरकार और नियामक संस्थाओं द्वारा 'प्राइस डिफरेंशियल क्लेम' (PDC) के रूप में लगभग 107 अरब रुपये का बकाया भुगतान रोकने से तेल उद्योग की कमर टूट गई है।
इस संकट की जड़ें 'प्राइस डिफरेंशियल क्लेम' की जटिल प्रक्रिया में छिपी हैं। दरअसल, जब पाकिस्तान सरकार जनता को राहत देने के लिए ईंधन की कीमतें उसकी वास्तविक खरीद लागत से कम निर्धारित करती है, तो उस वित्तीय अंतर की भरपाई कंपनियों को सरकार द्वारा की जाती है। वर्तमान में स्थिति यह है कि मार्च के मध्य में फाइल किया गया 27 बिलियन रुपये का पहला क्लेम केवल आंशिक रूप से सेटल हुआ है, जबकि 70 से 80 बिलियन रुपये के बाद के दावे सरकारी फाइलों में दबे पड़े हैं। भुगतान में इस अत्यधिक देरी के कारण कंपनियों को बाजार से भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ रहा है, जिससे उनका परिचालन मार्जिन लगभग समाप्त हो चुका है।
उद्योग जगत ने पाकिस्तान की तेल और गैस नियामक संस्था (OGRA) पर जानबूझकर प्रक्रिया को उलझाने का गंभीर आरोप लगाया है। औद्योगिक अधिकारियों का कहना है कि समस्या पारदर्शिता की कमी नहीं, बल्कि नियामक द्वारा पैदा की गई अनिश्चितता है। आरोप है कि हर बार जब कंपनियां नियमों का पालन करती हैं, तो अथॉरिटी नई दस्तावेजी मांगें पेश कर देती है। इनवॉइस-स्तर के मिलान से लेकर सीईओ और ऑडिटर्स के बार-बार प्रमाणीकरण तक, प्रक्रिया को एक अंतहीन चक्र में बदल दिया गया है। सोमवार रात जारी किए गए नए संशोधित फॉर्मेट ने इस भ्रम को और बढ़ा दिया है, जिससे उद्योग में यह संदेश गया है कि सरकार के पास भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं है।
स्थिति तब और भयावह हो गई जब यह प्रस्ताव सामने आया कि संघीय राजस्व बोर्ड (FBR) के साथ टैक्स मिलान होने तक भुगतान का 10 प्रतिशत हिस्सा रोक लिया जाए। यदि इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है, तो उद्योग के 7.4 बिलियन रुपये अगले दो महीनों के लिए और अटक जाएंगे। वरिष्ठ औद्योगिक सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि ऊर्जा मंत्रालय ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया और दस्तावेजीकरण के लिए एक निश्चित ढांचा तैयार नहीं किया, तो लिक्विडिटी का यह अभाव जल्द ही देशव्यापी फ्यूल सप्लाई में रुकावट का कारण बनेगा। पाकिस्तान के लिए यह केवल एक आर्थिक संकट नहीं, बल्कि एक ऐसा सुरक्षा जोखिम है जो देश के परिवहन और बिजली क्षेत्र को पूरी तरह ठप कर सकता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
