Pakistan fuel crisis 2026 : पश्चिम एशिया में सुलगती युद्ध की आग के बीच पाकिस्तान एक बार फिर विनाशकारी आर्थिक संकट के मुहाने पर खड़ा नजर आ रहा है। इस बार संकट की गंभीरता का अंदाजा खुद पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक के उस बयान से लगाया जा सकता है, जिसमें उन्होंने देश के पास ईंधन की भारी कमी को स्वीकार किया है। एक निजी टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में मलिक ने बेहद कड़े लहजे में स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी 'रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार' (SPR) मौजूद नहीं है। वैश्विक अस्थिरता और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है, क्योंकि देश की ऊर्जा सुरक्षा अब पूरी तरह से खतरे में है।

पाकिस्तान के मौजूदा हालातों की तुलना भारत की सुदृढ़ व्यवस्था से करते हुए मंत्री अली मलिक ने अपनी लाचारी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत के पास 60 से 70 दिनों का तेल भंडार सुरक्षित है, जिसे वहां की सरकार केवल एक हस्ताक्षर (Single Sign) के माध्यम से आपात स्थिति में जारी कर सकती है। इसके विपरीत, पाकिस्तान की स्थिति इतनी दयनीय है कि उसके पास केवल 5 से 7 दिनों का ही व्यावसायिक कच्चे तेल का भंडार शेष है। ओएमसी (Oil Marketing Companies) के पास मौजूद स्टॉक भी अधिकतम 20 से 21 दिनों तक ही चल सकता है। मलिक ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ने इस संकट से निपटने के लिए विस्तृत रिसर्च करवाई और सलाहकारों से रिपोर्ट भी मांगी, लेकिन रणनीतिक भंडारों के संचालन में आने वाली करोड़ों डॉलर की भारी-भरकम लागत के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा सकी है।

भारत की ऊर्जा शक्ति का आंकड़ा पाकिस्तान के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है। रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के मामले में दोनों देशों के बीच की खाई को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • भारत की क्षमता : भारत के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन (लगभग 3692 करोड़ बैरल) तेल भंडार की क्षमता है।
  • रणनीतिक सुरक्षा : भारत यह भंडार भूमिगत गुफाओं में सुरक्षित रखता है, जिससे युद्ध या आपूर्ति बाधित होने पर देश की अर्थव्यवस्था थमती नहीं है।
  • पाकिस्तान की वर्तमान स्थिति : पाकिस्तान के पास शून्य रणनीतिक भंडार है और वह पूरी तरह से सीमित वाणिज्यिक स्टॉक पर निर्भर है।
  • भविष्य की योजना : होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरों को देखते हुए अब पाकिस्तान 90 दिनों का भंडार बनाने की योजना पर विचार कर रहा है, जो फिलहाल केवल कागजों तक सीमित है।

मंत्री मलिक ने वैश्विक बाजार की अस्थिरता पर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें जिस तरह से उतार-चढ़ाव भरी रही हैं, वह पाकिस्तान जैसी कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए घातक है। हालांकि शहबाज शरीफ सरकार सब्सिडी के माध्यम से जनता को राहत देने और पेट्रोल की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखला को अनिश्चित बना दिया है।

पाकिस्तान का यह तेल संकट न केवल उसकी ऊर्जा नीति की विफलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि दूरदर्शी रणनीतिक नियोजन के अभाव में कोई देश कैसे घुटनों पर आ सकता है। जहां भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर आत्मनिर्भर और सुरक्षित है, वहीं पाकिस्तान अब भी "अगर और मगर" के फेर में फंसा हुआ है। यदि जल्द ही रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार पर काम शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले समय में पाकिस्तान की सड़कों पर पहिए थमना निश्चित है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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