पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2025 में बढ़े तनाव और युद्ध का मुख्य मुद्दा सीमा पार आतंकवादी गतिविधियां और डूरंड लाइन पर विवाद है। जुलाई 2021 में तालिबान के काबुल में सत्ता पुनः स्थापित होने के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते जटिल हो गए हैं। पाकिस्तान आरोप लगाता है कि अफगानिस्तान में सक्रिय तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और अन्य आतंकवादी गुट उसे अपनी भूमि पर हमले करने के लिए पनाह देते हैं।


इस आरोप की वजह से दोनों देशों के बीच हिंसक टकराव बढ़ा; ताजा घटनाओं में अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के काबुल, खोस्त, जलालाबाद, और पक्तिका जैसे इलाकों में हवाई हमले किए, जिसे अफगान सुरक्षा बलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। इस युद्ध में दोनों पक्षों के सैकड़ों सैनिक मारे गए और सीमा पर कई सैन्य चौकियों पर कब्जा हुआ।


इस मामले में पाकिस्तान के जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख 'मौलाना फजलुर रहमान' ने अपनी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान बार-बार विदेशी युद्धों में फंसकर अपनी आंतरिक स्थितियों को खराब कर रहा है। वे कहते हैं कि सेना को चाहिए कि वह अफगानिस्तान के साथ लड़ाई करने की बजाय पाकिस्तान के अंदर आतंकवाद, गरीबी, और आर्थिक समस्याओं को सुलझाए। मौलाना फजलुर रहमान के अनुसार, पाकिस्तान को अफगानिस्तान के साथ आतंकवादी सहायता को लेकर आरोप लगाने के बजाय शांति और भाईचारे का रास्ता अपनाना चाहिए।


मौलाना ने अफगानिस्तान को लेकर फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सेना के मौजूदा रुख पर बात करते हुए कहा कि, "पाकिस्तान अब एक और खुद की शुरू की हुई जंग नहीं झेल सकता।" उन्होंने चेतावनी दी कि देश को 1971 के बांग्लादेश युद्ध और 1999 के कारगिल युद्ध को नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि ये ऐसे उदाहरण हैं जब पाकिस्तान की सेना के लापरवाह फैसलों से देश की छवि को बड़ा नुकसान हुआ था।


उन्होंने सेना की हवाई हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि यह कार्यवाही मुस्लिम देशों के बीच झगड़ा है जो किसी के हित में नहीं। मौलाना के मुताबिक युद्ध को रोक कर अगर बातचीत की जाए और समझौते से एक दूसरे का साथ दिया जाए, तो दोनों देशों को फ़ायदा होगा। वे दोनों देशों के बीच केंद्रीय मुद्दों को डिप्लोमैसी से निपटाने की सलाह देते हैं। उनके मुताबिक, पाकिस्तान को भारत, अफगानिस्तान, और अन्य पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाकर क्षेत्रीय स्थिरता पर काम करना चाहिए।


पाकिस्तान के राजनीतिक दलों ने मौलाना फजलुर रहमान की बात पर अलग-अलग राय दी है। उनकी पार्टी जेयूआई-एफ और कुछ अन्य धार्मिक या क्षेत्रीय दल शांति की अपील का समर्थन करते हैं और मानते हैं कि युद्ध से कोई फायदा नहीं होगा। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पहले अपने अंदरूनी मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। हालाँकि, सेना के करीबी दल जैसे पीएमएल-एन और पीटीआई, मौलाना की बात से असहमति जताते हैं और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जरूरत बताते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story