पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भड़की हिंसा ; JAAC आंदोलन में 11 की मौत और 70 से अधिक घायल
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में JAAC आंदोलन के दौरान रावलाकोट और मुजफ्फराबाद में भीषण झड़पें हुईं, जिसमें 11 लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल हो गए। गेहूं-बिजली महंगाई, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षित सीटों के विवाद को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन हिंसक रूप ले गया, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हिंसक झड़प
पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में हालात उस समय भयावह रूप ले बैठे जब संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (Joint Awami Action Committee - JAAC) के समर्थकों और सुरक्षा बलों के बीच हुए हिंसक टकराव ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। जून 7 और 8 को रावलाकोट और मुजफ्फराबाद सहित कई शहरों में भड़की इस हिंसा में अब तक कम से कम 11 लोगों की मौत और 70 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। यह घटनाक्रम उस समय और अधिक संवेदनशील हो गया जब क्षेत्र में पहले से ही बंद और प्रदर्शन की घोषणा को लेकर तनाव चरम पर था।
प्रदर्शनकारियों का विरोध मुख्य रूप से बढ़ती हुई गेहूं और बिजली की कीमतों, राजनीतिक हाशिए पर धकेले जाने और आगामी चुनावों में शरणार्थियों के लिए आरक्षित सीटों के विवाद को लेकर था। JAAC का आरोप है कि यह व्यवस्था स्थानीय जनता के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है और बाहरी प्रभाव को बढ़ावा देती है। दूसरी ओर, प्रशासन ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे कानून-व्यवस्था के लिए खतरा घोषित किया था, जिसके बाद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई।
Situation grim in Muzaffarabad of Pakistan Occupied Kashmir as Pakistani Security Forces use brutal force against civilians. pic.twitter.com/92q8cRHYw7
— Aditya Raj Kaul (@AdityaRajKaul) June 9, 2026
हिंसा की शुरुआत उस समय और तेज हो गई जब विभिन्न इलाकों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। रावलाकोट में विशेष रूप से तनाव उस समय बढ़ा जब कुछ समूह एक अस्पताल के मोर्चरी के पास एकत्र हुए, जहां पहले हुई गोलीबारी में मारे गए एक प्रदर्शनकारी का शव रखा गया था। इसके बाद हालात तेजी से बिगड़ते चले गए और सुरक्षा बलों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव शुरू हो गया।
आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पथराव, आगजनी और कुछ स्थानों पर गोलीबारी की घटनाएं भी सामने आईं। प्रशासन का कहना है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने हथियारों और पेट्रोल बमों का उपयोग किया, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई करनी पड़ी। इस संघर्ष में पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कई जवान भी घायल हुए हैं। मृतकों के आंकड़े में चार पुलिसकर्मी, एक आम नागरिक और छह प्रदर्शनकारी शामिल बताए जा रहे हैं, जबकि घायलों की संख्या 70 से अधिक पहुंच चुकी है, जिनमें 23 सुरक्षा कर्मी और 50 से अधिक प्रदर्शनकारी शामिल हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सरकारी पक्ष का कहना है कि JAAC एक प्रतिबंधित संगठन है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई आवश्यक थी। वहीं प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह पूरा मामला “नागरिकों पर दमन” और “राज्य अत्याचार” का उदाहरण है। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल राजनीतिक अधिकारों, महंगाई, बिजली और गेहूं की कीमतों तथा प्रतिनिधित्व के मुद्दों को लेकर था।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना को लेकर प्रतिक्रिया देखने को मिली है। रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन के 50 से अधिक सांसदों ने विदेश सचिव को पत्र लिखकर इस क्षेत्र में तनाव कम करने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। उधर, स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में हड़ताल और बंद का दौर जारी रहा, साथ ही गिरफ्तारियों और सेवाओं पर प्रतिबंधों ने जनजीवन को और प्रभावित किया।
यह पूरा घटनाक्रम केवल एक स्थानीय विरोध नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक असंतोष, आर्थिक दबाव और प्रतिनिधित्व के विवादों का परिणाम माना जा रहा है, जिसने अंततः पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में एक गंभीर और रक्तरंजित टकराव का रूप ले लिया।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
