Donald Trump Masoud Pezeshkian : वैश्विक कूटनीति के पन्नों पर एक नया अध्याय लिखा जा चुका है और भारत ने इस बदलते घटनाक्रम पर बेहद आक्रामक और रणनीतिक रुख अपनाया है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा है कि भारत, ईरान और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक ज्ञापन समझौते (MoU) का खुलकर स्वागत करता है। इस अप्रत्याशित डेवलपमेंट को भारत वैश्विक मंच पर एक बड़ी उम्मीद के रूप में देख रहा है। नई दिल्ली को पूरा भरोसा है कि यह समझौता न केवल मध्य पूर्व बल्कि दुनिया भर में क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को मजबूत करने में एक बड़ा और सकारात्मक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

इस बड़े कूटनीतिक मोड़ की गूंज 16वीं ब्रिक्स (BRICS) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की हाई-प्रोफाइल बैठक में सुनाई दी। इस वैश्विक मंच से दुनिया को संबोधित करते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने भारत का रुख पूरी ताकत से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका और ईरान के बीच हुए इस अभूतपूर्व ज्ञापन समझौते का पूरे दिल से स्वागत करता है और देश को यह पूरी उम्मीद है कि यह ऐतिहासिक कदम धरातल पर पूरी तरह काम करेगा। डोभाल ने इसके दूरगामी फायदों को रेखांकित करते हुए साफ किया कि इस समझौते से न केवल दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया जीवन मिलेगा, बल्कि बेघरों के लिए एक सुरक्षित स्टेट का चयन होना अपने आप में एक बहुत बड़ा और मानवीय दृष्टिकोण से क्रांतिकारी डेवलपमेंट है।

इस समझौते के रणनीतिक और आर्थिक पहलुओं पर गहराई से बात करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने इसके बड़े आर्थिक फायदों को भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बेहद सधे हुए शब्दों में कहा कि इस संधि के लागू होने से वैश्विक सप्लाई चेन में लंबे समय से आ रही तमाम रुकावटें पूरी तरह दूर हो जाएंगी। विशेष रूप से फर्टिलाइजर (उर्वरक) और केमिकल जैसे क्षेत्रों में जो बड़ी कमियां और संकट पूरी दुनिया के सामने मंडरा रहे थे, वे अब काफी हद तक पूरे हो जाएंगे। डोभाल ने होर्मुज स्ट्रेट जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों का जिक्र करते हुए कहा कि इस पूरे इलाके और उससे आगे के देशों को जो नेविगेशन (नौवहन) की पूर्ण आजादी मिलने जा रही है, उससे भारत सहित कई देशों की आर्थिक खुशहाली में अप्रत्याशित रूप से बहुत बड़ी बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक बिरादरी को आगाह भी किया कि हमें हर वक्त नए सुरक्षा खतरों और उभरती हुई चुनौतियों के प्रति पूरी तरह सतर्क और सजग रहना होगा।

इस ऐतिहासिक शांति समझौते की नींव 17 जून को रखी गई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने दोनों देशों के बीच चल रहे युद्ध और भारी तनाव को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे। इस बेहद गोपनीय और बड़े समझौते के तहत दोनों महाशक्तियों के बीच डील की आखिरी शर्तों पर निर्णायक बातचीत करने के लिए सीजफायर यानी युद्धविराम को अगले 60 दिनों के लिए बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया। इस एक दस्तखत ने अमेरिका और ईरान के बीच पिछले लगभग चार महीने से चल रहे उस भयंकर टकराव को पूरी तरह शांत कर दिया है, जिसने पूरी दुनिया की सांसें अटका रखी थीं। अब तेहरान के परमाणु कार्यक्रम और इस पूरे इलाके के बेहद पेचीदा सुरक्षा मुद्दों पर शांति से बैठकर बातचीत करने के लिए दोनों देशों को 60 दिन का एक बेहद कीमती समय मिल गया है।

आधिकारिक और कानूनी मोर्चे पर भारत पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच दुश्मनी को खत्म करने, इलाके को पूरी तरह स्थिर बनाने और ठप पड़े वैश्विक व्यापार को फिर से रफ्तार देने के मकसद से हुए इस समझौते की वकालत कर चुका है। भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है कि लगातार और बिना रुके होने वाली बातचीत ही पश्चिम एशिया में एक स्थायी और पक्की शांति का एकमात्र रास्ता है। मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के जरिए बिना किसी रुकावट के नौवहन की आजादी और दुनिया भर में व्यापार का सुचारू फ्लो बनाए रखने के लिए यह कूटनीति बेहद जरूरी थी। भारत ने हमेशा से ही वैश्विक मंचों पर तनाव को कम करने, बातचीत का रास्ता अपनाने और मजबूत डिप्लोमेसी की वकालत की है, जो इस भयंकर संघर्ष को जल्दी और स्थायी रूप से खत्म करने के लिए सबसे जरूरी हथियार साबित हुए हैं।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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