NIA चार्जशीट में खुलासा; जाने कैसे पाक से आए 'डिजिटल कोड' ने ली 26 मासूमों की जान
पहलगाम नरसंहार पर NIA का बड़ा खुलासा: पाकिस्तान से आए कॉर्डिनेट्स और स्थानीय मददगारों की साजिश ने ली 26 मासूमों की जान। पढ़ें आतंक के खात्मे की पूरी कहानी।

पहलगाम आतंकी हमले की जांच के दौरान साक्ष्य जुटाती नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की टीम।
NIA chargesheet Pahalgam terror attack : ठीक एक साल पहले कश्मीर की हसीन वादियों में स्थित पहलगाम जब पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार था, तब सरहद पार पाकिस्तान में बैठी आतंक की मशीनरी एक खौफनाक पटकथा लिख रही थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की चार्जशीट और पुख्ता सबूतों के आधार पर अब उस 'काले चिट्ठे' का पर्दाफाश हुआ है, जिसने न केवल 26 मासूमों की जान ली, बल्कि भारत और पाकिस्तान को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था। इस आतंकी हमले की नींव डिजिटल कॉर्डिनेट्स और मोबाइल ऐप्स के जरिए रखी गई थी। मुख्य आतंकी बिलाल अफजल उर्फ फैसल जट्ट ने अपने आका हबीबुल्लाह साजिद जट्ट के आदेश पर अल्पाइन क्वेस्ट ऐप में हमले के सटीक लोकेशन को सेव किया था, जिसके बाद वह अपने दो अन्य साथियों, हबीब ताहिर और हनन जफर के साथ बैसरन पार्क के पास के जंगलों में घात लगाकर बैठ गया था।
आतंकियों ने इस नरसंहार को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर भी जाल बिछाया था। हमले से दो दिन पहले भारी बारिश का फायदा उठाते हुए ये आतंकी परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथड़ के संपर्क में आए, जिन्होंने न केवल इन हत्यारों को पनाह दी बल्कि उन्हें टमाटर-चावल खिलाकर उनकी खातिरदारी भी की। आतंकियों ने शाल के नीचे अपनी घातक एम-4 और एके-47 राइफलों को छिपा रखा था और वे स्थानीय मददगारों से अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था और आसपास की रेकी के बारे में जानकारी जुटा रहे थे। 21 अप्रैल की दोपहर करीब दो बजे का वह मंजर आज भी रूह कंपा देने वाला है, जब इन आतंकियों ने बैसरन पार्क में मौजूद पर्यटकों को बंदूक की नोक पर घेर लिया। आतंकियों ने एक-एक कर पर्यटकों से कलमा पढ़ने को कहा और जो ऐसा नहीं कर पाए, उन्हें बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। इस नरसंहार में अकेले बिलाल अफजल ने अपनी एम-4 राइफल से 11 निर्दोषों का खून बहाया था।
बिलाल अफजल का आतंक केवल पहलगाम तक सीमित नहीं था; वह रियासी में हिंदू श्रद्धालुओं की बस पर हमले, गगनगीर कंस्ट्रक्शन साइट पर कत्लेआम और गुलमर्ग के बूटा पथरी हमले जैसे आधा दर्जन से अधिक आतंकी वारदातों का मुख्य चेहरा रहा था। हमले के बाद जब ये आतंकी फरार हुए, तो एनआईए ने फॉरेंसिक साक्ष्यों, डीएनए सैंपल्स और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर जांच का दायरा बढ़ाया। जांच में खुलासा हुआ कि परवेज और बशीर ने ही आतंकियों को रसद और जानकारी मुहैया कराई थी। अंततः 23 जुलाई को आतंकियों का एक बंद पड़ा वॉकी-टॉकी दागवान घाटी में सिग्नल देते ही सेना के राडार पर आ गया। भारतीय सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ने पांच लेयर का सुरक्षा घेरा बनाकर 28 जुलाई को इन तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया। फॉरेंसिक जांच में यह प्रमाणित हुआ कि इनके पास से बरामद हथियारों का इस्तेमाल ही पहलगाम और रियासी सहित कई अन्य बड़े हमलों में किया गया था। यह पूरी रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे तकनीकी सतर्कता और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने अंततः न्याय सुनिश्चित किया।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
