India-Russia Bilateral Trade 2030 Target : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक नई ऊर्जा भर दी है। 4–5 दिसंबर को होने वाली 23वीं भारत-रूस वार्षिक समिट के साथ-साथ आयोजित होने वाला भारत-रूस बिजनेस फोरम इस साझेदारी को और गहरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होने वाला है। भारत के प्रमुख निर्यातक संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन्स (FIEO) ने शुक्रवार को कहा कि यह यात्रा व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देगी और दोनों देशों के बीच विस्तारित आर्थिक अवसरों के दरवाजे खोलेगी।


ताज़ा आंकड़े इस बढ़ती साझेदारी के मजबूत आधार को स्पष्ट करते हैं। वित्त वर्ष 2026 की अप्रैल से अगस्त अवधि में भारत का रूस को निर्यात 1.84 अरब डॉलर रहा, जबकि रूस से आयात 26.45 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इससे पहले वित्त वर्ष 2024–25 में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार रिकॉर्ड 68.7 अरब डॉलर पर पहुंच चुका था, जिसमें कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक और अन्य कच्चे माल का बड़ा योगदान था। निर्यात 4.88 अरब डॉलर के स्तर पर रहा, जबकि आयात 63.84 अरब डॉलर के पार चला गया था।


फियो ने बताया कि 2021 से अब तक केवल चार वर्षों में भारत-रूस व्यापार पाँच गुना से अधिक बढ़कर लगभग 13 अरब डॉलर से वर्तमान 68 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। यह वृद्धि न केवल ऊर्जा सहयोग की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि विविध क्षेत्रों में उभरते अवसरों को भी रेखांकित करती है। इसी तेज़ी को देखते हुए दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर के स्तर पर ले जाने का लक्ष्य तय किया है।


फियो के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि भारत फार्मास्युटिकल्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि-उत्पाद, ऑटो एवं ऑटो-कंपोनेंट्स और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में रूस को निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है। पश्चिमी कंपनियों के रूस से बाहर निकलने के बाद कई क्षेत्रों में खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भारतीय निर्यातक प्रभावी रूप से भर सकते हैं। यही नहीं, द्विपक्षीय निवेश भी तेजी से बढ़ रहा है और 2025 तक इसे 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।


भारत में रूसी निवेश मुख्य रूप से तेल-गैस, पेट्रोकेमिकल्स, बैंकिंग, रेलवे और इस्पात उद्योगों में केंद्रित है। वहीं रूस में भारतीय निवेश ऊर्जा और दवा उद्योग में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए है। दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाले अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का विस्तार इस सहयोग को और सुगम, लागत-प्रभावी तथा तेज़ बना रहा है।


पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियाँ नए समीकरण बना रही हैं। भारत और रूस इस बदलते माहौल में अपने व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की तैयारी में हैं। आगामी समिट न केवल व्यापारिक तरक्की का नया खाका तैयार करेगी, बल्कि दोनों देशों को अगले दशक की साझा आर्थिक दिशा भी देगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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